Edited By Tanuja,Updated: 01 Nov, 2026 11:21 AM

इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। दो प्रमुख अरब पार्टियां राआम और जॉइंट लिस्ट, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को समर्थन देने के संकेत दे रही हैं। दोनों के पास 19 सीटें हैं। समर्थन...
Jerusalem: इजराइल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। उनके खिलाफ विपक्षी खेमे को दो प्रमुख अरब पार्टियों का समर्थन मिलने की संभावना है जिस कारण नेतन्याहू के लिए राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। हालिया चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में नई सरकार के गठन को लेकर असमंजस बना हुआ है। इस बीच दो प्रमुख अरब पार्टियों राआम और जॉइंट लिस्ट ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को समर्थन देने के संकेत दिए हैं।दोनों अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। ऐसे में उनका समर्थन नेतन्याहू विरोधी गठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
बाहर से समर्थन देने को तैयार जॉइंट लिस्ट'टाइम्स ऑफ इजराइल' की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉइंट लिस्ट नेतन्याहू विरोधी पार्टियों को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार है। हालांकि, वह खुद सरकार में शामिल नहीं होना चाहती। जॉइंट लिस्ट के सांसद अहमद तिबी ने कहा कि वे हर उस व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं जो मौजूदा सरकार को गिराकर उसकी जगह नई सरकार बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि वे इस बदलाव और उम्मीद का हिस्सा बनना चाहते हैं। अरब राजनीतिक आंदोलन के प्रमुख चेहरे जाफर फराह के मुताबिक, राआम और जॉइंट लिस्ट दोनों इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को बता सकती हैं कि वे गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
आइसेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव
फराह ने संकेत दिया कि दोनों पार्टियां इजराइली सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइसेनकोट को अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तावित कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। सांसद अहमद तिबी ने कथित तौर पर आइसेनकोट से कहा कि उन्हें दिवंगत प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की तरह होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि जॉइंट लिस्ट नई सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है। यित्जाक राबिन 1993 में हुए ओस्लो समझौते के लिए जाने जाते हैं। इस समझौते के तहत इजराइल ने फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के साथ बातचीत शुरू की थी। उस समय राबिन के इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन दो अरब नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टियों ने उनकी सरकार को समर्थन दिया था। इजराइल में मौजूदा राजनीतिक हालात के बीच उसी तरह के राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
किसके पास कितनी सीटें?
'टाइम्स ऑफ इजराइल' की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। जॉइंट लिस्ट के चेयरमैन यूसुफ जबरीन ने भी पुष्टि की है कि नेतन्याहू विरोधी पार्टियों के साथ बातचीत हुई है। 2023 में हमास के हमले के बाद इजराइल में हुए पहले चुनाव में नेतन्याहू विरोधी यहूदी बहुमत वाली पार्टियों को 48 सीटें मिली थीं। वहीं, दोनों अरब बहुमत वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की थीं। नेतन्याहू के नेतृत्व वाले खेमे को 53 सीटें मिलीं, जबकि इससे पहले उसके पास 68 सीटें थीं। इजराइल की संसद में कुल 120 सदस्य होते हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में यदि गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को दोनों अरब पार्टियों का समर्थन मिलता है तो उसके पास 67 सीटें हो सकती हैं। यह बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए पर्याप्त है।हालांकि, समर्थन और गठबंधन की अंतिम स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तय होगा कि नेतन्याहू की सत्ता बचती है या इजराइल को नया प्रधानमंत्री मिलता है।