लेबनान में दाखिल हुई इजरायली सेना, 40 साल से लापता एयरमैन रॉन अराद की तलाश में चलाया गुप्त ऑपरेशन

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 10:21 PM

israeli forces entered lebanon

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने लेबनान में एक बड़ा और गुप्त सैन्य अभियान चलाया।

इंटरनेशनल डेस्कः ईरान-इजरायल युद्ध के बीच Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने लेबनान में एक बड़ा और गुप्त सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन के तहत इजरायली सेना ने पूर्वी लेबनान में घुसकर कार्रवाई की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लगभग 40 साल से लापता इजरायली एयरमैन रॉन अराद का पता लगाना था।

हालांकि इजरायली सेना ने शनिवार को बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान रॉन अराद के अवशेष या उनसे जुड़ा कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

ऑपरेशन के दौरान कई लोगों की मौत

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई में कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। बताया गया कि यह ऑपरेशन पूर्वी लेबनान के Nabi Chit इलाके में हुआ, जहां इजरायली कमांडो और Hezbollah के लड़ाकों के बीच जबरदस्त झड़प हुई। वहीं Lebanese Armed Forces ने भी पुष्टि की कि इस मुठभेड़ में उसके तीन सैनिकों की मौत हो गई।

हेलीकॉप्टर से पहुंचे इजरायली कमांडो

रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायली कमांडो हेलीकॉप्टरों के जरिए सीमा पार करके लेबनान के पहाड़ी इलाके में उतरे। इसके बाद वे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए नबी चित शहर तक पहुंचे। स्थानीय लोगों के अनुसार कमांडो यूनिट ने शहर के एक कब्रिस्तान में जाकर एक कब्र भी खोदी, लेकिन वहां से कोई अहम जानकारी नहीं मिली और बाद में वे वापस लौट गए। इजरायली सेना के अरबी प्रवक्ता Avichay Adraee ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान इजरायली सेना को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

कौन हैं रॉन अराद?

Ron Arad इजरायल की वायुसेना के एक नेविगेटर थे, जो 1986 में लेबनान में एक मिशन के दौरान लापता हो गए थे। दरअसल उस समय उनका फाइटर जेट लेबनान में क्रैश हो गया था। दुर्घटना के बाद वह पैराशूट के जरिए नीचे उतरे, लेकिन उन्हें लेबनान के शिया मुस्लिम संगठन Amal Movement ने पकड़ लिया। बाद में एक शिया संगठन “Believers' Resistance” ने उनकी कुछ तस्वीरें जारी की थीं। इसके बाद से उनका कोई पुख्ता सुराग नहीं मिल पाया।

नबी चित इलाके में रखे जाने की खबर

बताया जाता है कि रॉन अराद को कुछ समय तक नबी चित इलाके में कैद करके रखा गया था। लेकिन 1988 में दक्षिण लेबनान के Meidoun गांव में हुई लड़ाई के बाद उनका कोई पता नहीं चल सका और तब से वह पूरी तरह लापता हैं।

पहले भी किए गए कई अभियान

इजरायल ने रॉन अराद का पता लगाने के लिए पहले भी कई बार अभियान चलाए हैं। 1994 में इजरायली कमांडो ने लेबनान में छापा मारकर “Believers' Resistance” के नेता Mustafa Dirani को पकड़ लिया था और उन्हें इजरायल ले गए थे। बाद में 2004 में कैदियों की अदला-बदली के दौरान उन्हें रिहा कर दिया गया। एक समय ऐसा भी आया जब लगभग 200 लेबनानी और 450 फिलीस्तीनी कैदियों के बदले रॉन अराद को छोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इजरायल ने यह सौदा स्वीकार नहीं किया। बताया जाता है कि 1988 में रॉन अराद को लेकर आखिरी बार कोई जानकारी सामने आई थी।

लेबनान में बढ़ता सैन्य तनाव

इस गुप्त ऑपरेशन के साथ-साथ इजरायली सेना ने लेबनान के कई इलाकों में हवाई हमले भी किए। दक्षिण लेबनान के Jouaiya, Arab Salim और Jibshit जैसे गांवों में हुए हमलों में कई लोगों की मौत की खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब हाल ही में बढ़े ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण पूरे मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का हिस्सा है। दरअसल हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए थे, जिसके जवाब में इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है। इससे लेबनान-इजरायल सीमा पर हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।

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