Edited By Rohini Oberoi,Updated: 19 Feb, 2026 09:20 AM

मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ अमेरिका ने ईरान पर हमले की रणनीतिक तैयारी पूरी कर ली है वहीं दूसरी तरफ तेहरान के शाहरियार (Shahriar) इलाके में हुए जोरदार धमाकों ने पूरी दुनिया को चौकन्ना कर दिया है। रमजान के मुकद्दस महीने में...
US-Iran Conflict : मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ अमेरिका ने ईरान पर हमले की रणनीतिक तैयारी पूरी कर ली है वहीं दूसरी तरफ तेहरान के शाहरियार (Shahriar) इलाके में हुए जोरदार धमाकों ने पूरी दुनिया को चौकन्ना कर दिया है। रमजान के मुकद्दस महीने में जंग की इस दस्तक ने स्थानीय लोगों में भारी खौफ पैदा कर दिया है।
धमाकों से थर्राया तेहरान: क्या IRGC के ठिकाने बने निशाना?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में तेहरान के आसमान में काले धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार ये धमाके शाहरियार इलाके में हुए हैं जहां ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के गोला-बारूद और ईंधन डिपो स्थित हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन शिराज (Shiraz) प्रांत में भी ऐसी ही आवाज़ें सुनाई देने की खबर है।
अमेरिका की किलेबंदी: समंदर में मौत का सामान तैयार
परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) के विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार अरब सागर में USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर. फोर्ड जैसे दो विशालकाय विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) पहले से मौजूद हैं। इनके साथ 50 से ज्यादा अत्याधुनिक लड़ाकू विमान (F-22, F-35, और F-16) किसी भी समय उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। सुरक्षा के लिए 'थाड' (THAAD) और 'पैट्रियट' मिसाइल बैटरियों को तैनात किया गया है।
तनाव की असली वजह: परमाणु समझौता और पुराना विवाद
दोनों देशों के बीच इस टकराव की जड़ें साल 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से जुड़ी हैं। 2018 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया, तब से स्थिति बिगड़ती गई। अब ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम बंद करने से इनकार करने के बाद, अमेरिका 'छोटे हमलों' के जरिए बड़े सैन्य अभियान की चेतावनी दे रहा है।