Edited By Pardeep,Updated: 09 Jan, 2026 05:40 AM

रूस और अमेरिका के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। साल 2026 में दोनों परमाणु महाशक्तियां आमने-सामने दिखाई दे रही हैं। जुबानी धमकियों और सैन्य गतिविधियों को देखकर दुनिया में बड़े विनाश की आशंका गहराने लगी है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं...
इंटरनेशनल डेस्कः रूस और अमेरिका के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। साल 2026 में दोनों परमाणु महाशक्तियां आमने-सामने दिखाई दे रही हैं। जुबानी धमकियों और सैन्य गतिविधियों को देखकर दुनिया में बड़े विनाश की आशंका गहराने लगी है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि अगर स्थिति बिगड़ी, तो यह टकराव परमाणु युद्ध में भी बदल सकता है।
रूस की संसद स्टेट ड्यूमा की रक्षा समिति के डिप्टी हेड और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी नेता एलेक्सी जुरालेव ने अमेरिका को खुली धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पर टॉरपीडो से हमला किया जा सकता है, परमाणु बम गिराया जा सकता है या फिर अटलांटिक महासागर में अमेरिकी जहाजों को डुबोया जा सकता है।
इसके जवाब में अमेरिका भी पीछे नहीं हटा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ शब्दों में कहा कि पूरा पश्चिमी गोलार्ध अमेरिका का प्रभाव क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला को दुश्मन देशों का ऑपरेटिंग बेस नहीं बनने दिया जाएगा और वहां के तेल संसाधनों पर किसी विरोधी देश का कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वेनेजुएला बना रूस-अमेरिका टकराव का केंद्र
इस पूरी जुबानी जंग के केंद्र में वेनेजुएला है। वही वेनेजुएला, जहां के राष्ट्रपति को पहले ट्रंप प्रशासन ने ‘किडनैप कूटनीति’ के तहत आधी रात घर से उठवा लिया था। वही देश, जहां से रूस और चीन को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल सप्लाई होता रहा है। हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के पास समुद्र में एक रूसी तेल टैंकर को पकड़कर अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद माना जा रहा है कि पुतिन काफी नाराज हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि अटलांटिक महासागर में किसी भी वक्त बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है। अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए रूस ने वेनेजुएला के पास परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। ये सभी रूसी नॉर्दर्न फ्लीट का हिस्सा हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस परमाणु पनडुब्बी की हो रही है, जिसे दुनिया ‘समंदर का यमराज’ कहती है।
समंदर के नीचे रूस का ‘यमराज’
रूस की जिस पनडुब्बी ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है, उसका नाम BS-329 बेलगोरोद है। यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे रहस्यमयी परमाणु पनडुब्बी मानी जाती है। इसमें करीब 100 मेगाटन का परमाणु पेलोड ले जाने की क्षमता है।
यह पनडुब्बी दुनिया के सबसे खतरनाक अंडरवॉटर न्यूक्लियर ड्रोन पोसाइडन को लॉन्च कर सकती है। इसके जरिए समुद्र के अंदर 500 मीटर तक ऊंची रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा की जा सकती है। माना जाता है कि यह अमेरिका के तटीय शहरों को कुछ ही पलों में तबाह कर सकती है और वहां फैले रेडिएशन के कारण कई सालों तक इंसानों का रहना नामुमकिन हो सकता है।
दावा किया जाता है कि इस पनडुब्बी का तोड़ दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है—यहां तक कि अमेरिका के पास भी नहीं। इसी वजह से अमेरिका में डर और बेचैनी का माहौल है।
अमेरिका ने क्यों एक्टिव किया डूम्सडे विमान?
रूस की परमाणु पनडुब्बी की हलचल के बाद अमेरिका ने अपना सबसे संवेदनशील हथियार सिस्टम एक्टिव कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बोइंग E-4B नाइटवॉच को सक्रिय किया, जिसे अमेरिका का ‘डूम्सडे प्लेन’ कहा जाता है।
यह विमान वॉशिंगटन डीसी के बाहर कैंप स्प्रिंग्स एयरफील्ड पर उतारा गया है। इससे पहले इसका इस्तेमाल 9/11 के आतंकी हमलों के समय किया गया था। इसके बाद इसे सिर्फ बेहद गंभीर हालात में ही एक्टिव किया जाता है।
डूम्सडे विमान की खास खूबियां
-
परमाणु युद्ध की स्थिति में यह उड़ता हुआ कमांड सेंटर बन जाता है
-
इसमें बेहद लो और हाई फ्रीक्वेंसी एंटेना लगे हैं, जो न्यूक्लियर युद्ध के दौरान भी संपर्क बनाए रखते हैं
-
इसे परमाणु विस्फोट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स से सुरक्षित बनाया गया है
-
यह सीधे न्यूक्लियर पनडुब्बियों, बॉम्बर्स और ICBM मिसाइल सिस्टम से संपर्क कर सकता है
-
राष्ट्रपति और शीर्ष सैन्य अधिकारी जमीन पर सब कुछ तबाह होने पर भी यहीं से सेना को कमांड दे सकते हैं
हालांकि एक आम गलतफहमी यह है कि यह विमान खुद न्यूक्लियर मिसाइल लॉन्च करता है। असल में यह सिर्फ कमांड और कंट्रोल सेंटर है, हथियार लॉन्च करने वाला विमान नहीं।
तेल टैंकर से शुरू हुई परमाणु दुश्मनी
इस पूरे विवाद की जड़ एक रूसी तेल टैंकर है। अमेरिका ने नॉर्थ अटलांटिक में रूसी ऑयल टैंकर Bella-1 को जब्त कर लिया। यह पहली बार था जब अमेरिका ने सीधे किसी रूसी समुद्री संपत्ति पर कब्जा किया। अमेरिकी सेना ने करीब दो हफ्ते तक पीछा करने के बाद इस टैंकर को अपने नियंत्रण में लिया। अमेरिका ने आरोप लगाया कि टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। इसके अलावा अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में M/T सोफिया नाम के एक और टैंकर को भी अपने कब्जे में ले लिया।
इन दोनों टैंकरों को अब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ब्रिटेन ले जा रही है। ब्रिटेन ने दावा किया है कि उसने इस ऑपरेशन में अमेरिका को खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया।
चीन को भी लगा झटका
इस कार्रवाई से अमेरिका ने रूस के साथ-साथ चीन को भी बड़ा झटका दिया है। ये दोनों टैंकर वेनेजुएला से कच्चा तेल लेकर चीन जा रहे थे। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन चोरी-छिपे रूस से सस्ता तेल खरीद रहा था। अब अमेरिका इस रास्ते को पूरी तरह बंद करना चाहता है। इससे रूस-चीन के तेल व्यापार को भारी नुकसान हो सकता है। पुतिन इसे अपनी बेइज्जती मान रहे हैं और इसी वजह से रूस ने अटलांटिक में परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं।