ईरान से नहीं, टॉयलेट से परेशान अमेरिकी सैनिक! दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत पर अजीब संकट

Edited By Updated: 24 Feb, 2026 11:33 PM

american soldiers are troubled not by iran but by toilets

एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सख्त रुख दिखा रहे हैं और मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य जमावड़ा खड़ा कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड पर तैनात 5 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक एक अलग ही...

इंटरनेशनल डेस्कः  एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सख्त रुख दिखा रहे हैं और मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य जमावड़ा खड़ा कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड पर तैनात 5 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक एक अलग ही परेशानी से जूझ रहे हैं।

उन्हें फिलहाल ईरान से ज्यादा चिंता सुबह के समय टॉयलेट की है, क्योंकि इस समुद्री “चलते-फिरते शहर” के करीब 650 टॉयलेट बार-बार जाम हो रहे हैं।

जून से लगातार समुद्र में तैनात

USS जेराल्ड आर. फोर्ड पिछले साल जून से लगातार समुद्र में तैनात है। वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े एक मिशन के बाद सैनिकों को उम्मीद थी कि अब वे घर लौट पाएंगे। लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण उनकी तैनाती को आगे बढ़ा दिया गया। अब हालात ऐसे हैं कि जहाज पर मौजूद सैनिक लंबे समय से समुद्र में ही डटे हुए हैं।

बन सकता है नया रिकॉर्ड

आमतौर पर शांति काल में कोई भी विमानवाहक पोत लगभग 6 महीने के लिए समुद्र में रहता है। लेकिन USS फोर्ड के सैनिक 8 महीने से ज्यादा समय से ड्यूटी पर हैं। संभावना जताई जा रही है कि यह तैनाती 11 महीने तक बढ़ सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिकी नौसेना के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड होगा। लंबे समय तक समुद्र में रहने से जहाज का नियमित मेंटिनेंस प्रभावित हो रहा है। इतने बड़े पोत को समय-समय पर बंदरगाह पर लाकर जांच और मरम्मत की जरूरत होती है, जो फिलहाल पूरी तरह नहीं हो पा रही।

13 अरब डॉलर का जहाज और सीवेज की समस्या

करीब 13 अरब डॉलर (एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) की लागत से बने इस अत्याधुनिक पोत को तकनीक का चमत्कार माना जाता है। लेकिन अब यह सीवेज सिस्टम की समस्या से जूझ रहा है। NPR की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पोत का वैक्यूम आधारित टॉयलेट सिस्टम काफी जटिल है। यदि एक टॉयलेट में खराबी आती है तो उससे जुड़ा पूरा सेक्शन काम करना बंद कर सकता है। इस वजह से कई हिस्सों में टॉयलेट इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाते।

पाइपों में फंसी टी-शर्ट और रस्सियां

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब जाम टॉयलेट खोले गए तो पाइपों में अजीब चीजें मिलीं। कहीं टी-शर्ट फंसी थी तो कहीं करीब 4 फुट लंबी रस्सी जैसी वस्तु मिली। ऐसी चीजें फ्लश करने से सिस्टम ब्लॉक हो रहा है। मेंटिनेंस स्टाफ 24 घंटे लीकेज और जाम की समस्या ठीक करने में लगा है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है।

घर की याद और ‘घोस्ट मोड’

तकनीकी दिक्कतों के अलावा सैनिक मानसिक दबाव भी झेल रहे हैं। अधिकतर क्रू मेंबर्स की उम्र 30 साल से कम है। सुरक्षा कारणों से जहाज अक्सर “घोस्ट मोड” में रहता है, यानी संचार सीमित कर दिया जाता है। ऐसे में सैनिक अपने परिवार से ठीक से संपर्क नहीं कर पाते।खबरों के अनुसार, कई सैनिक इतने परेशान हो चुके हैं कि मिशन खत्म होने के बाद नेवी छोड़ने तक पर विचार कर रहे हैं।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे बड़ी तैनाती

इस समय अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पहले से ही इलाके में मौजूद है और अब USS फोर्ड भी वहां तैनाती के लिए आगे बढ़ रहा है। समुद्र में एक साथ दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी बेहद दुर्लभ मानी जाती है। यह संकेत देता है कि अमेरिका किसी बड़े कदम की तैयारी में है।

बड़ी ताकत, छोटी लेकिन गंभीर समस्या

दुनिया का सबसे आधुनिक और महंगा युद्धपोत इस समय टॉयलेट जैसी बुनियादी समस्या से जूझ रहा है। यह मामला दिखाता है कि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, लंबे समय तक लगातार तैनाती से छोटी समस्याएं भी बड़ी चुनौती बन सकती हैं। फिलहाल जहाज पर तैनात सैनिकों के लिए असली चिंता युद्ध नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सुविधाओं की है।

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