ग्रीनलैंड के बाद चागोस बना ट्रंप का नया हथियार, अब डिएगो गार्सिया सौदे पर US-UK में तकरार

Edited By Updated: 20 Jan, 2026 07:39 PM

trump slams u k deal to hand over chagos islands as great stupidity

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले को ‘मूर्खतापूर्ण’ बताया है। ब्रिटिश सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताते हुए बचाव किया, जबकि विपक्ष ने चीन-रूस के खतरे की चेतावनी...

London: चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी आलोचना के बाद ब्रिटिश सरकार हैरान और दबाव में आ गई है। मंगलवार को ब्रिटेन ने अपने फैसले का जोरदार बचाव किया, जबकि इससे पहले ट्रंप प्रशासन इस समझौते का समर्थन कर चुका था।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “हैरानी की बात है कि हमारा ‘शानदार’ नाटो सहयोगी ब्रिटेन डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की योजना बना रहा है, जहां अमेरिका का बेहद महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है।” उन्होंने दावा किया कि इस कदम को चीन और रूस ने कमजोरी के तौर पर जरूर देखा होगा। ट्रंप ने इसे “घोर मूर्खता” करार देते हुए कहा कि यही कारण है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।

 

ट्रंप की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अमेरिका के साथ बिगड़ते संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। स्टार्मर ने हाल ही में ट्रंप के ग्रीनलैंड संबंधी बयानों को “पूरी तरह गलत” बताया था, लेकिन साथ ही कहा था कि मतभेदों को शांतिपूर्ण बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। ब्रिटेन और मॉरीशस ने मई 2025 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत करीब 200 वर्षों के ब्रिटिश नियंत्रण के बाद चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को दी जाएगी। हालांकि, डिएगो गार्सिया द्वीप जहां संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डा है उसे ब्रिटेन कम से कम 99 वर्षों के लिए पट्टे पर वापस लेगा।

 

अमेरिकी सरकार ने पहले इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा था कि इससे डिएगो गार्सिया स्थित सैन्य अड्डे का दीर्घकालिक और स्थिर संचालन सुनिश्चित होगा। ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री डैरेन जोन्स ने कहा कि यह समझौता “अगले 100 वर्षों के लिए सैन्य अड्डे को सुरक्षित करेगा।” ब्रिटिश सरकार ने दोहराया कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगी, और यह समझौता संयुक्त सैन्य अड्डे की क्षमताओं को बनाए रखने तथा दुश्मन देशों को दूर रखने के लिए मजबूत प्रावधानों के साथ किया गया है। हालांकि, ब्रिटेन के विपक्षी दलों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।

 

उनका कहना है कि चागोस द्वीपसमूह छोड़ने से चीन और रूस के हस्तक्षेप का खतरा बढ़ सकता है। समझौते को मंजूरी देने वाला विधेयक निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में पारित हो चुका है, लेकिन ऊपरी सदन में इस पर तीखा विरोध दर्ज किया गया है।कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैडेनोच ने कहा कि ट्रंप सही हैं और यह नीति ब्रिटेन की सुरक्षा और संप्रभुता को कमजोर करती है, साथ ही नाटो सहयोगियों को भी दुश्मनों के सामने कमजोर बनाती है।aअमेरिका के अनुसार, डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर करीब 2,500 सैनिक, जिनमें अधिकांश अमेरिकी हैं, तैनात हैं। यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में सुरक्षा अभियानों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।
 

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