ईरान में तानाशाही की हदें पारः इरफान सुल्तानी को चौराहे पर फांसी का ऐलान, ट्रंप बोले- ऐसा हुआ तो ये ताबूत में आखिरी कील होगा !

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 01:35 PM

trump vows very strong action if iran executes protesters

ईरान में 18वें दिन भी हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को सरेआम फांसी देने की तैयारी है। मानवाधिकार संगठनों ने इसे दमन की चरम सीमा बताया है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि फांसी दी गई तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

International Desk: ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन अब खुले तौर पर क्रांति का रूप लेता नजर आ रहा है। देशभर में लगातार 18वें दिन प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत और 10,000 से ज्यादा की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी बीच खामेनेई शासन एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जिसे हालात के लिए निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। बुधवार को 26 वर्षीय युवा प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को सरेआम फांसी दी जा सकती है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, हालिया आंदोलन के दौरान वह पहले व्यक्ति हो सकते हैं जिन्हें मौत की सजा दी जाएगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है, तो उसकी ये ताबूत में आखिरी कील साबित होगा क्योंकि अमेरिका उसके खिलाफ "बहुत कड़ी कार्रवाई" करेगा । मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ईरानी अधिकारियों की हिंसक कार्रवाई में 2500 से ज़्यादा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।

 

कौन है इरफान सुल्तानी?

मध्य ईरान के फार्दिस शहर में कपड़ों की दुकान चलाने वाले इरफान सुल्तानी कोई पेशेवर राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे। 8 जनवरी को उन्हें अपने घर से गिरफ्तार किया गया था। उनका ‘अपराध’ सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान आजादी के नारे लगाए। गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें जेल भेज दिया गया और फिर बेहद तेज प्रक्रिया में मौत की सजा सुना दी गई।ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक, 11 जनवरी को सुल्तानी की एक संक्षिप्त सुनवाई हुई, जिसके बाद उन पर ‘मोहारेबेह’ (अल्लाह के खिलाफ युद्ध) का आरोप लगाते हुए फांसी की सजा सुना दी गई। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह आरोप अक्सर ईरान में असहमति को कुचलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

 

परिवार को सिर्फ 10 मिनट
हेंगॉव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, सुल्तानी के परिवार को करीब पांच दिन पहले फांसी की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया है कि फांसी से पहले इरफान को परिवार से सिर्फ 10 मिनट की आखिरी मुलाकात की अनुमति दी जाएगी। संगठन की सदस्य अरिना मोरादी के मुताबिक, परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों का कहना है कि इरफान को कानूनी सलाह, बचाव का अधिकार और निष्पक्ष सुनवाई जैसे बुनियादी अधिकारों से पूरी तरह वंचित रखा गया।इरफान की बहन एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, जो कानूनी रास्ते से उन्हें बचाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन परिवार का आरोप है कि उन्हें केस फाइल तक देखने की इजाजत नहीं दी जा रही।

 

ट्रंप की चेतावनी: जवाब तय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। ट्रंप पहले ही प्रदर्शनकारियों से कह चुके हैं कि “डटे रहो, मदद आ रही है।”विश्लेषकों का मानना है कि अगर इरफान सुल्तानी को सरेआम फांसी दी जाती है, तो आंदोलन कमजोर होने की बजाय और भड़क सकता है। इससे अमेरिका को ईरान पर कार्रवाई का सीधा आधार भी मिल सकता है।

 

ईरान का पलटवार
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए कहा है कि ईरानी नागरिकों की मौत के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इरफान सुल्तानी की फांसी वाकई खामेनेई शासन के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।
 

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