तालिबान में मौजूद अमरीका-ब्रिटेन के जासूस अप्रैल से रख रहे थे जवाहिरी पर पूरी नजर

Edited By rajesh kumar,Updated: 04 Aug, 2022 03:25 PM

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इस रविवार को सुबह जब अल कायदा चीफ अयमान अल जवाहिरी सोकर उठा तो उसे खबर नहीं थी कि काबुल की यह खूबसूरत सुबह उसकी जिंदगी का आखिरी दिन है। वह यह भी नहीं जानता था कि जिस घर को वह अपने और अपने परिवार के लिए बेहद सुरक्षित मानता है, उसके बाहर खड़े तालिबान...

इस रविवार को सुबह जब अल कायदा चीफ अयमान अल जवाहिरी सोकर उठा तो उसे खबर नहीं थी कि काबुल की यह खूबसूरत सुबह उसकी जिंदगी का आखिरी दिन है। वह यह भी नहीं जानता था कि जिस घर को वह अपने और अपने परिवार के लिए बेहद सुरक्षित मानता है, उसके बाहर खड़े तालिबान सैनिक उसकी दिनचर्या की पूरी रिपोर्ट महीनों से अमरीका और ब्रिटेन को भेज रहे हैं। उसके यहां छुपे होने की रिपोर्ट कई सप्ताह से व्हाइट हाऊस में राष्ट्रपति जो बाइडेन की मेज पर पड़ी थी।  जवाहिरी का ठिकाना पूरी तरह से कैमरे के फोकस में था और उसे न सिर्फ वॉशिंगटन में बल्कि खुफिया निगरानी केंद्रों हारोगेट, उत्तरी यॉर्कशायर में तभी से देखा जा रहा था जब से पश्चिमी खुफिया एजैंसी में भर्ती हुए एक सोर्स ने उसे काबुल के इस घर की बालकनी में देखा था। 

10 हजार फुट से ज्यादा ऊपर चक्कर काट रहा था ड्रोन

रविवार की सुबह एक अमरीकी रीपर ड्रोन काबुल के उस घर पर करीब 10 हजार फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर बिना किसी की नजर में आए चक्कर काट रहा था, जिसमें जवाहिरी रह रहा था। इसी ड्रोन से 45-45 किलो की दो आर9एक्स हेलफायर मिसाइलें दागी गईं, जो 1600 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आगे बढ़ीं। इनमें कोई विस्फोटक नहीं था सिर्फ 6-6 ब्लेड लगे थे। जवाहिरी को कोई आवाज सुनाई देती उससे पहले वह मारा जा चुका था।

अफगानिस्तान जवाहिरी ने कभी छोड़ा ही नहीं था

तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक असल में अल जवाहिरी ने कभी लंबे समय के लिए अफगानिस्तान को छोड़ा ही नहीं था। सितम्बर, 2001 में जब अमरीकी सेना मित्र देशों के साथ अफगानिस्तान में अभियान चला रही थी, तब भी वह वहां से नहीं भागा बल्कि अफगानिस्तान के दक्षिणी हेलमंद प्रांत के मुसा किला के दुर्गम पहाड़ों में कहीं छिपा था। वह इतना लो प्रोफाइल बनकर रहता था कि कई बार सीमा पार कर पाकिस्तान गया मगर कस्टम अफसरों को कभी उसके जवाहिरी होने का गुमान नहीं हुआ। 
1 जुलाई
व्हाइट हाऊस के क्रिसिस कमांड सैंटर के सिचुएशन रूम में एक खास बैठक हुई। बाइडेन तब 5 दिन के यूरोप दौरे से लौटे ही थे। उन्हें बताया गया कि किस तरह से जवाहिरी पर स्ट्राइक की जा सकती है। इस बैठक में सुरक्षा सलाहकार और सी.आई.ए. डायरैक्टर विलियम बन्र्स भी मौजूद थे, जिन्होंने बाइडेन को उस पूरे घर का मॉडल दिखाया और बताया कि इस जगह पर जवाहिरी को निशाना बनाया जा सकता है।
25 जुलाई
कोविड-19 की वजह से एकांतवास कर रहे बाइडेन ने आखिरकार अपने घर से ही जवाहिरी पर स्ट्राइक को मंजूरी दी।
31 जुलाई
ऑप्रेशन की पूरी तैयारी कर ली गई थी। इस ऑप्रेशन की फाइनल स्टेज की अमरीका और इंगलैंड दोनों जगह से निगरानी की जा रही थी। इसके अलावा अमरीका और ब्रिटेन का खुफिया विभाग भी उत्तरी यॉर्कशायर के हारोगेट और आर.ए.एफ. हिल से निगरानी कर रहा था। सैटेलाइट जवाहिरी के घर का सीधा प्रसारण कर रहा था। अब बस काबुल में सुबह होने का इंतजार किया जा रहा था।

ऐसे हुआ प्लान पर काम

इस साल अप्रैल के शुरू में अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवान ने पहली बार राष्ट्रपति बाइडेन को बताया कि वर्षों की तलाश के बाद आखिरकार अमरीकी खुफिया एजैंसियों ने जवाहिरी का ठिकाना खोज लिया है।  

अप्रैल में ही हेलमंद से काबुल आया

ब्रिटेन के खुफिया सूत्रों के अनुसार जवाहिरी का परिवार इस साल अप्रैल में ही हेलमंद से काबुल आया था। जवाहिरी ने चार शादियां की थीं, जिनसे 7 बच्चे हुए। इनमें से कम से कम उसके 4 बच्चे उसकी पहली पत्नी अज्जा के साथ एक हमले में मारे गए थे। अब वह सिर्फ अपनी एक पत्नी और बेटी के साथ रह रहा था। 

लाडेन को ढूंढने वाली तकनीक ही काम आई

सी.आई.ए. ने लाडेन के ऐबटाबाद ठिकाने का पता उसके संदेशवाहक का पीछा कर लगाया था। इसी तरह जवाहिरी के ठिकाने के बारे में भी जानकारी संदेशवाहक का पीछा कर मिली। काबुल के पॉश शेरपुर इलाके में बने इस घर की बाऊंड्री वाल काफी ज्यादा ऊंची थी।

ऐसे की जवाहिरी होने की पुष्टि

इस घर की सुरक्षा में तैनात तालिबान में भर्ती एक लड़ाके को ब्रिटेन ने अपना जासूस बना लिया था। उसने कई स्रोतों से जवाहिरी के यहां होने की पुष्टि की। इनमें जवाहिरी के नाम आई डाक, चित्र और अन्य जानकारियां शामिल थीं। 

निगरानी ऑप्रेशन शुरू हुआ

तालिबान में मौजूद ब्रिटिश जासूस द्वारा वहां जवाहिरी के होने की पुष्टि के बाद अमरीका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से निगरानी अभियान शुरू किया और हक्कानी नैटवर्क की सभी प्रॉपर्टीज की निगरानी शुरू कर दी। इससे जवाहिरी की लोकेशन की फिर से पुष्टि हुई।

घर की हर गतिविधि का अध्ययन

जवाहिरी के ठिकाने की पुष्टि होने के बाद घर के भीतर की उसकी जानकारियों का ब्यौरा जुटाने का काम शुरू किया गया। उसकी दिनचर्या का ब्यौरा तैयार किया गया। इसमें पाया गया कि जवाहिरी सुबह उठने के बाद निश्चित समय पर बालकनी में आता है और कुछ देर के लिए चारों ओर खड़े होकर देखता है। 

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