Purple Color Ban: ये है वो देश जहां बैंगनी रंग पहनने पर मिलती है 'मौत की सजा', जानें क्यों?

Edited By Updated: 08 Jan, 2026 12:43 PM

wearing purple was a crime in this country wearing purple was punishable

आज के समय में बैंगनी (Purple) रंग का कपड़ा पहनना बहुत सामान्य बात है लेकिन इतिहास में एक दौर ऐसा भी था जब इस रंग को पहनने की गलती करने पर किसी भी आम इंसान को सरेआम 'मौत की सजा' दी जा सकती थी। प्राचीन रोमन साम्राज्य से लेकर एलिजाबेथ के शासनकाल वाले...

Purple Color Ban: आज के समय में बैंगनी (Purple) रंग का कपड़ा पहनना बहुत सामान्य बात है लेकिन इतिहास में एक दौर ऐसा भी था जब इस रंग को पहनने की गलती करने पर किसी भी आम इंसान को सरेआम 'मौत की सजा' दी जा सकती थी। प्राचीन रोमन साम्राज्य से लेकर एलिजाबेथ के शासनकाल वाले इंग्लैंड तक बैंगनी रंग सिर्फ एक फैशन नहीं बल्कि शक्ति और राजशाही का सबसे बड़ा प्रतीक था।

सोने से भी महंगा क्यों था बैंगनी रंग?

प्राचीन समय में बैंगनी रंग की कीमत हीरे-जवाहरात से भी कहीं ज्यादा थी। इसकी दुर्लभता के पीछे एक चौंकाने वाली वजह थी। उस दौर में आज की तरह केमिकल वाले रंग नहीं होते थे। मशहूर 'टायरियाई बैंगनी' (Tyrian Purple) रंग भूमध्य सागर में पाए जाने वाले म्यूरेक्स (Murex) नाम के एक समुद्री घोंघे से निकाला जाता था। इस रंग को बनाने की प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि मात्र एक ग्राम रंग तैयार करने के लिए लगभग 9,000 घोंघों की जान लेनी पड़ती थी। अपनी इसी दुर्लभता के कारण बैंगनी कपड़ा सोने के वजन के बराबर या उससे भी महंगा बिकता था।

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रोमन और ब्रिटिश साम्राज्य के कड़े कानून

चूँकि यह रंग बहुत कीमती था इसलिए इसे सत्ता का प्रतीक बना दिया गया:

  1. प्राचीन रोम: रोमन कानून के अनुसार केवल सम्राट और उनके परिवार के सदस्य ही पूरी तरह से बैंगनी रंग के कपड़े पहन सकते थे। अगर कोई आम नागरिक ऐसा करता पाया जाता तो इसे राजद्रोह (Treason) माना जाता था और उसे फांसी की सजा तक दी जा सकती थी।

  2. एलिजाबेथ इंग्लैंड: सदियों बाद महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने भी इंग्लैंड में 'सुम्पट्यूरी कानून' (Sumptuary Laws) लागू किए। ये कानून तय करते थे कि व्यक्ति अपनी सामाजिक हैसियत के हिसाब से क्या पहन सकता है। बैंगनी रंग को केवल शाही परिवार के लिए सुरक्षित रखा गया। नियम तोड़ने वालों को भारी जुर्माना, जेल या संपत्ति की जब्ती का सामना करना पड़ता था।

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एक गलती जिसने बदल दिया इतिहास

हजारों सालों से चला आ रहा यह शाही एकाधिकार साल 1856 में एक वैज्ञानिक प्रयोग के दौरान अचानक खत्म हो गया।

  • विलियम हेनरी पर्किन का आविष्कार: मात्र 18 साल के एक केमिस्ट विलियम हेनरी पर्किन मलेरिया की दवा (कुनैन) बनाने की कोशिश कर रहे थे। प्रयोग के दौरान उनके बीकर में एक गहरा बैंगनी रंग का पदार्थ बना।

  • सिंथेटिक डाई: पर्किन ने गलती से दुनिया की पहली 'सिंथेटिक डाई' (Mauveine) खोज ली थी। अब बैंगनी रंग को घोंघों के बजाय फैक्ट्रियों में बनाना संभव हो गया।

  • सबके लिए उपलब्ध: इस आविष्कार के बाद बैंगनी रंग इतना सस्ता और आम हो गया कि आम जनता भी इसे पहनने लगी। धीरे-धीरे शाही प्रतिबंधों का कोई महत्व नहीं रहा और यह कानून इतिहास के पन्नों में दफन हो गया।

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