Edited By Anu Malhotra,Updated: 11 Feb, 2026 08:45 AM

36 घंटे का उपवास (Fasting) शरीर के लिए एक "डीप क्लीनिंग" की तरह काम करता है। न्यूरोसर्जन डॉक्टर के अनुसार, जब आप इतनी लंबी अवधि तक कुछ नहीं खाते, तो शरीर ऊर्जा के लिए अपने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल लेता है।
नेशनल डेस्क: 36 घंटे का उपवास (Fasting) शरीर के लिए एक "डीप क्लीनिंग" की तरह काम करता है। एक न्यूरोसर्जन डॉक्टर के अनुसार, जब आप इतनी लंबी अवधि तक कुछ नहीं खाते, तो शरीर ऊर्जा के लिए अपने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल लेता है।
1. ऑटोफैगी (कोशिकाओं की सफाई)
उपवास के लगभग 16 से 24 घंटों के बाद शरीर 'ऑटोफैगी' की प्रक्रिया शुरू करता है। इसका अर्थ है "खुद को खाना"। इसमें कोशिकाएं अपने अंदर जमा बेकार और खराब हिस्सों को साफ करने लगती हैं और उन्हें रिसाइकल करके नई, स्वस्थ कोशिकाएं बनाती हैं। यह शरीर के आंतरिक नवीनीकरण जैसा है।
2. जिद्दी चर्बी का कम होना (Fat Burning)
36 घंटे के दौरान, शरीर में जमा ग्लूकोज खत्म हो जाता है। ऐसे में ऊर्जा पाने के लिए शरीर 'केटोसिस' मोड में चला जाता है। यहाँ शरीर ऊर्जा के लिए सीधे जमा हुई चर्बी (Body Fat) को जलाना शुरू कर देता है, जिससे वजन घटाने में बहुत मदद मिलती है।
3. दिमाग की कार्यक्षमता में सुधार
डॉक्टर के अनुसार, उपवास के दौरान मस्तिष्क में BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नामक प्रोटीन का स्तर बढ़ता है। यह याददाश्त सुधारने, ध्यान केंद्रित करने और नई मस्तिष्क कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, जिससे दिमाग पहले से अधिक 'शार्प' महसूस होता है।
4. इंसुलिन रेजिस्टेंस और शुगर कंट्रोल
इतने लंबे समय तक कुछ न खाने से शरीर में इंसुलिन का स्तर काफी गिर जाता है। इससे शरीर की इन्सुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है, जो टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी है।
5. सूजन (Inflammation) में कमी
लगातार उपवास से शरीर में पुराने दर्द और सूजन पैदा करने वाले सेल्स कम होने लगते हैं। यह हृदय रोग और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।