Edited By Ramanjot,Updated: 27 Jan, 2026 09:57 PM

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से आध्यात्मिक आस्था से जुड़ी एक खास खबर सामने आई है। यहां जैन समाज के आठ लोगों ने भौतिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाते हुए संन्यास जीवन अपनाने का निर्णय लिया है।
नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से आध्यात्मिक आस्था से जुड़ी एक खास खबर सामने आई है। यहां जैन समाज के आठ लोगों ने भौतिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाते हुए संन्यास जीवन अपनाने का निर्णय लिया है। इन मुमुक्षुओं में सबसे कम उम्र 13 साल और सबसे अधिक 27 साल है, जो इस फैसले को और भी असाधारण बनाता है। इनमें कोई अपने पूरे परिवार के साथ वैराग्य का मार्ग चुन रहा है, तो किसी ने विदेश भ्रमण, करियर और आधुनिक जीवनशैली को पीछे छोड़कर साधु-साध्वी बनने का संकल्प लिया है।
कठोर तप और परीक्षा के बाद मिली दीक्षा की स्वीकृति
जैन धर्म में दीक्षा केवल इच्छा से नहीं मिलती, इसके लिए कठिन साधना और आत्मसंयम की कसौटियों से गुजरना जरूरी होता है। रायपुर के इन आठों मुमुक्षुओं को भी गुरु की अनुमति पाने से पहले कठोर अनुशासन का पालन करना पड़ा। करीब 18 घंटे तक नंगे पांव चलना, सीमित व सादा भोजन, और शारीरिक-मानसिक सहनशक्ति की परीक्षा ली गई। सभी मापदंडों पर खरे उतरने के बाद ही दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की गई।
मुंबई में होगा भव्य दीक्षा समारोह
8 फरवरी को मुंबई में आयोजित होने वाले संयमरंग महोत्सव में इन आठों मुमुक्षुओं को दीक्षा दी जाएगी। इस महोत्सव में देशभर से कुल 64 मुमुक्षु संन्यास जीवन में प्रवेश करेंगे।
रायपुर से शामिल होने वालों में तीन बाल दीक्षार्थी भी हैं, जिन्हें गुरु की विशेष अनुमति मिली है।
सुरभि भंसाली: करियर और विदेश यात्रा छोड़ी, साध्वी बनने का फैसला
27 वर्षीय सुरभि भंसाली का निर्णय लोगों को खास तौर पर प्रेरित कर रहा है। फूड टेक्नोलॉजी में मास्टर्स डिग्री हासिल कर चुकी सुरभि विदेश यात्रा, खासकर स्विट्जरलैंड घूमने की इच्छा रखती थीं। सोशल मीडिया पर सक्रिय और आधुनिक जीवन जी रही सुरभि के जीवन में चातुर्मास के दौरान गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन आया। इसके बाद उन्होंने सांसारिक मोह छोड़कर साध्वी बनने का दृढ़ निश्चय किया।
एक परिवार, एक निर्णय: सबने छोड़ी सांसारिक दुनिया
रायपुर की आम्रपाली सोसायटी निवासी आशीष सुराना ने अपनी पत्नी रितु और दोनों बेटों आर्यन और आरुष के साथ एक साथ मुमुक्षु बनने का फैसला किया है। आशीष सुराना होलसेल बैग के व्यवसाय से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने अपना पूरा कारोबार बेचकर वैराग्य का मार्ग अपनाया। एक ही परिवार के चार सदस्यों का एक साथ दीक्षा लेना समाज में विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।
पूरे शहर में चर्चा, आस्था और त्याग की मिसाल
कम उम्र में सुख-सुविधाओं और करियर को त्यागने का यह फैसला न केवल जैन समाज, बल्कि पूरे रायपुर में चर्चा का केंद्र बन गया है। लोग इसे आस्था, संयम और आत्मिक शांति की प्रेरक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।