Edited By Radhika,Updated: 16 Jan, 2026 01:53 PM

मोदी सरकार अब यूपीए सरकार के दौर के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों Right to Education (2009) और Food Security Act (2013) का कायाकल्प कर सकती है। सरकार का मानना है कि केवल 'अधिकार' दे देना काफी नहीं है, बल्कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना जरुरी है।...
नेशनल डेस्क: मोदी सरकार अब यूपीए सरकार के दौर के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों Right to Education (2009) और Food Security Act (2013) का कायाकल्प कर सकती है। सरकार का मानना है कि केवल 'अधिकार' दे देना काफी नहीं है, बल्कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना जरुरी है। मनरेगा को 'जी-राम-जी' (VB-G RAM G) मिशन से बदलने के बाद, अब इन दो कानूनों में व्यापक सुधारों का खाका तैयार किया जा रहा है।
क्यों पड़ रही है बदलाव की जरूरत?
परामर्श प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले एक दशक के अनुभव में तीन मुख्य खामियां उभरकर आई हैं:
1. गुणवत्ता का अभाव: RTE के बावजूद बच्चों को 'क्वालिटी एजुकेशन' नहीं मिल पा रही है।
2. लीकेज की समस्या: खाद्य सुरक्षा होने के बाद भी कई जरूरतमंद राशन से वंचित हैं, जबकि अपात्र लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।
3. पंजीकरण में कमी: लाभार्थियों का डेटाबेस 100% सटीक और डिजिटल नहीं है।
सरकार की नई रणनीति: आवास का अधिकार भी संभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिए हैं कि सभी कल्याणकारी योजनाओं में 'लीकेज' को पूरी तरह खत्म किया जाए। सरकार सबसे पहले नियमों (Rules) में बदलाव के जरिए सुधार करेगी। यदि नियमों से बात नहीं बनी, तो संसद में संशोधन विधेयक (Amendment Bills) पेश किए जाएंगे। एक बड़ी खबर यह भी है कि सरकार 'आवास के अधिकार' को भी कानूनी दर्जा देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
डिजिटल मॉनिटरिंग और रियल टाइम ट्रैकिंग
नए बदलावों के तहत सरकार का लक्ष्य हर लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करना और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। इसके लिए एक राष्ट्रव्यापी रजिस्ट्रेशन अभियान चलाया जाएगा, ताकि योजनाओं की 'रियल टाइम मॉनिटरिंग' हो सके और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाए।