Edited By Pardeep,Updated: 11 Mar, 2026 10:05 PM
मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन की दुनिया में एक संवेदनशील, प्रखर और बहुआयामी रचनाकार और समाजसेवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी लेखनी की विशिष्ट पहचान है—सरल और सहज भाषा में गहन भावों की अभिव्यक्ति, तथ्यात्मक...
मुंबई : मुकेश कुमार मासूम समकालीन हिंदी साहित्य, सिनेमा और वैचारिक लेखन की दुनिया में एक संवेदनशील, प्रखर और बहुआयामी रचनाकार और समाजसेवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी लेखनी की विशिष्ट पहचान है—सरल और सहज भाषा में गहन भावों की अभिव्यक्ति, तथ्यात्मक स्पष्टता के साथ साहित्यिक प्रवाह, और समाज को दिशा देने वाली चिंतनशील दृष्टि। उनकी रचनाएँ केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि संवेदनाओं, अनुभवों और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज़ हैं। मुकेश कुमार मासूम ने दर्द और मुसीबतों का सीना चीरकर अपने दम पर सफलता प्राप्त की है। ईमानदारी, सच्चाई, योग्यता, अथक परिश्रम और कुछ कर गुजरने के जूनून से अपना रास्ता खुद बनाया और खुद ही मंजिल तक पहुंचे।
मुकेश कुमार मासूम का जन्म 13 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के एक पिछड़े गाँव *दयानतपुर* में एक अत्यंत साधारण और श्रमिक परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्होंने जीवन के कठोर संघर्षों का सामना किया। आर्थिक अभाव इतने गहरे थे कि कम उम्र में ही उन्हें मेहनत-मज़दूरी और सिलाई जैसे कार्य करने पड़े। पारिवारिक परिस्थितियों ने उन्हें समय से पहले परिपक्व बना दिया। पिता से विरासत में मिले कर्ज़ को भी उन्होंने कम उम्र में ही अपने परिश्रम से चुकाया।
22 अप्रैल 1992 को बेहतर भविष्य और आत्मसम्मानपूर्ण जीवन की तलाश में वे अकेले ही सपनों की नगरी मुंबई पहुँचे। मुंबई की चकाचौंध के पीछे छिपे कठोर संघर्षों का सामना करते हुए उन्होंने धैर्य, परिश्रम और प्रतिभा के बल पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। संघर्षों की तपिश में तपकर उनका व्यक्तित्व और भी प्रखर हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म जगत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
उन्होंने M.A. (स्नातकोत्तर) तथा L.L.B. (कानून) की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में Ph.D. (शोधरत) हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके लेखन को तार्किक दृढ़ता प्रदान की है, जबकि जीवन और समाज के व्यापक अनुभवों ने उनकी रचनाओं को यथार्थ, संवेदना और मानवीय सरोकारों से समृद्ध किया है।
मुकेश कुमार मासूम *स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (SWA)* तथा *इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA)* के सदस्य हैं, जो साहित्य और फिल्म उद्योग—दोनों क्षेत्रों से उनके सक्रिय और सशक्त जुड़ाव का प्रमाण है। वे बॉलीवुड में एक स्थापित गीतकार के रूप में भी जाने जाते हैं और उन्होंने अनेक लोकप्रिय तथा चर्चित गीतों की रचना की है, जिनमें— *“दिल तोड़ने वाला, दिल का खुद निकला” (उदित नारायण), “दारू सिगरेट छोड़ दे” (ममता शर्मा), “जीवन एक अमृत है” (उदित नारायण), “मेरे मन को” (उदित नारायण), “भगवान ज़रूरी है” (अल्तमश फ़रीदी), “खाटू श्याम जाना है” (अनूप जलोटा), “जय भीम बोलो रे” (मोहम्मद अज़ीज़), “ब्रेकअप पार्टी” (हरमन नाज़िम), “मेनू हँसके विदा कर दे” (शबाब साबरी), “बौद्ध धर्म के अनुयाई” (अनूप जलोटा) तथा “उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा” (अगम कुमार निगम)* जैसे गीत विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई, लोकसंवेदना और आत्मीयता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके गीत श्रोताओं के मन को उसी प्रकार शीतलता प्रदान करते हैं जैसे तपते रेगिस्तान में अचानक मिल जाने वाली शीतल छाँव।
मुकेश कुमार मासूम
आज के समय में जब संगीत जगत में मौलिकता का संकट और पुराने गीतों के रीमिक्स का चलन बढ़ता जा रहा है, ऐसे दौर में मुकेश कुमार मासूम की लेखनी ताजगी, संवेदना और साहित्यिक गरिमा का नया आयाम प्रस्तुत करती है। कहा जाता है कि *“मुकेश मासूम शब्दों से जादू रचते हैं।”* उनकी रचनाएँ केवल गीत नहीं, बल्कि भावनाओं का संगीत और जीवन की अनुभूतियों का सजीव चित्र होती हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनकी चर्चित पुस्तक *“गुलिस्तां”* सहित अन्य कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों और समीक्षकों से सराहना प्राप्त हुई है। उनकी रचनाएँ केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पाठकों को सोचने, प्रश्न करने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं।
पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे मुंबई के एक बहुभाषीय *सात दैनिक समाचार पत्रों के समूह में वर्षों तक संपादक* रहे और अपने संपादकीय लेखन के माध्यम से समाज के विविध मुद्दों पर विचारोत्तेजक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते रहे। वर्तमान में वे *Cinevistaas Limited* जैसी सुप्रसिद्ध फिल्म और टेलीविजन निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही उनका " राष्ट्रमाता पॉडकास्ट " शुरू होने वाला है, जिसमें में देश की जानी - मानी हस्तियों के इंटरव्यू किया करेंगे।
साहित्य, सिनेमा और समाज—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रिय मुकेश कुमार मासूम की लेखनी आज भारतीय गीत-संस्कृति और वैचारिक साहित्य की एक मूल्यवान धरोहर के रूप में देखी जाती है। उनके शब्द केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि संवेदना जगाते हैं, विचार उत्पन्न करते हैं और समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करते हैं। आज देश में लाखों लोग उनकी सफल संघर्षमय कहानी से प्रेरणा लेते हैँ। पूर्व राष्टपति रामनाथ कोविंद भी मुकेश मासूम को उनकी उपलब्धियों पर सम्मानित कर चुके हैं। इस प्रकार मुकेश कुमार मासूम का जीवन और कृतित्व संघर्ष, संवेदना और सृजन की ऐसी प्रेरक यात्रा है, जो यह संदेश देता है कि सच्ची प्रतिभा और अटूट परिश्रम के बल पर साधारण पृष्ठभूमि से उठकर भी व्यक्ति असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।