Edited By Anu Malhotra,Updated: 10 Feb, 2026 11:22 AM

अभी फरवरी का महीना आधा भी नहीं बीता है और धूप की तपिश ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में पारा अभी से 26 डिग्री के पार जा चुका है। लेकिन यह तो महज एक झांकी है; मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो असली चुनौती अभी...
नेशनल डेस्क: अभी फरवरी का महीना आधा भी नहीं बीता है और धूप की तपिश ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में पारा अभी से 26 डिग्री के पार जा चुका है। लेकिन यह तो महज एक झांकी है; मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो असली चुनौती अभी बाकी है। प्रशांत महासागर में पनप रही 'अल नीनो' की स्थिति भारत समेत पूरी दुनिया को अगले तीन साल तक यानी 2028 तक पसीने छुड़ाने वाली गर्मी की आग में झोंक सकती है।
क्यों टूटेंगे गर्मी के रिकॉर्ड?
मौसम विभाग की नई रिपोर्ट संकेत दे रही है कि साल 2026 इतिहास के सबसे गर्म सालों की सूची में शामिल हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है प्रशांत महासागर में 'ला नीना' का कमजोर होना और 'अल नीनो' का सक्रिय होना। जब अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो वैश्विक तापमान में उछाल आता है और बारिश का सामान्य चक्र गड़बड़ा जाता है। ऊपर से बढ़ता हुआ कार्बन उत्सर्जन इस आग में घी डालने का काम कर रहा है। अनुमान है कि 2027 में यह गर्मी अपने चरम पर होगी, जिससे न केवल लू (Heatwave) का प्रकोप बढ़ेगा बल्कि जंगलों में आग लगने जैसी घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
उत्तर भारत में लू का तांडव और बारिश की कमी
इस साल मौसम का गणित थोड़ा पेचीदा रहने वाला है। मार्च और अप्रैल के दौरान दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में गरज-चमक के साथ होने वाली फुहारें गर्मी से कुछ राहत दिला सकती हैं। लेकिन असली मार उत्तर और पश्चिम भारत पर पड़ेगी। मई से जून के बीच इन इलाकों में झुलसा देने वाली लू चलने की आशंका है और इस दौरान बारिश की उम्मीद भी काफी कम है। अल नीनो के कारण मानसून पर भी काले बादल मंडरा रहे हैं, जिससे खेती और जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
ओडिशा से मिलेगी शुरुआत, पर अलग होगा अंदाज
आमतौर पर भारत में गर्मी की पहली दस्तक ओडिशा से होती है, जहां फरवरी में ही पारा चढ़ने लगता था। हालांकि, इस साल स्थिति थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओडिशा में गर्मी इस बार स्थानीय कारणों जैसे बढ़ते प्रदूषण और शहरीकरण की वजह से अधिक महसूस होगी। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार, भले ही यह गर्मी 2024 जितनी भयानक न हो, लेकिन अल नीनो का असर जून-जुलाई तक बना रहेगा, जिससे मानसूनी बारिश में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, आने वाले कुछ साल हमें कुदरत के बदलते और गर्म होते मिजाज के बीच गुजारने होंगे।