Edited By Shubham Anand,Updated: 14 Oct, 2025 08:18 PM
अंडमान की गहराइयों से भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए बड़ी खबर आई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने समुद्र की 2,650 मीटर गहराई में प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार खोजा है, जिसमें 87% मीथेन मौजूद है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे “ऊर्जा के अवसरों का...
नेशनल डेस्क : भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाली एक बड़ी उम्मीद जगाने वाली खोज सामने आई है। अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से महज 17 किलोमीटर दूर समुद्र की गहराई में प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार मिला है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को इस खोज से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "भारत की ऊर्जा कहानी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अंडमान तट से करीब 17 किलोमीटर दूर, समुद्र की गहराई में 2,650 मीटर नीचे एक बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार मिला है।" पुरी ने इसे "ऊर्जा के अवसरों का महासागर" करार दिया।
OIL की दूसरी कोशिश में सफलता
यह सफलता सरकारी महारत्न कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को मिली है। कंपनी ने अंडमान के शैलो ऑफशोर ब्लॉक में अपनी दूसरी ही ड्रिलिंग में यह कमयाबी हासिल की। खोज श्री विजयापुरम-2 कुएं में हुई, जो अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 9.20 नॉटिकल मील (लगभग 17 किलोमीटर) दूर स्थित है। यहां पानी की गहराई 295 मीटर और लक्षित ड्रिलिंग गहराई 2,650 मीटर थी। 2,212 से 2,250 मीटर की गहराई के बीच प्राकृतिक गैस का यह अनमोल खजाना मिला।
शुरुआती जांच में गैस के सैंपलों में लगभग 87% मीथेन पाया गया, जो इसे साफ, असरदार और उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन बनाता है। OIL ने बताया कि यह अंडमान बेसिन में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पहली आधिकारिक पुष्टि है। केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा, "गैस पूल का आकार और व्यावसायिक व्यवहार्यता आने वाले महीनों में सत्यापित होगी, लेकिन यह खोज बेसिन की हाइड्रोकार्बन क्षमता को समझने में मील का पत्थर साबित होगी।" यह खोज म्यांमार से इंडोनेशिया तक के क्षेत्र में हुई अन्य खोजों के अनुरूप है।
क्यों है यह खोज इतनी महत्वपूर्ण?
यह पहला मौका है जब अंडमान बेसिन में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि हुई है। पुरी ने इसकी तुलना दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना के तेल क्षेत्र से की, जहां 11.6 अरब बैरल तेल की खोज ने उसकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने कहा, "अंडमान की यह खोज भारत के लिए भी वैसी ही परिवर्तनकारी साबित हो सकती है।"
यह खोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'नेशनल डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन' (समुद्र मंथन) का हिस्सा है, जिसकी घोषणा उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर की थी। इस मिशन का उद्देश्य समुद्री क्षेत्रों में तेल-गैस की खोज को तेज करना है। पुरी ने कहा कि इससे पेट्रोब्रास, बीपी, शेल और एक्सॉनमोबिल जैसी वैश्विक कंपनियों की भारत में रुचि बढ़ेगी।
50% ऊर्जा जरूरत पूरी करने की क्षमता
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी रिस्टाड एनर्जी के अनुसार, अंडमान बेसिन में भारत की 50% ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की क्षमता हो सकती है। एजेंसी के एशिया-प्रशांत रिसर्च हेड प्रतीक पांडे ने बताया कि सीस्मिक सर्वे के शुरुआती अनुमानों से इस क्षेत्र में 307 से 370 मिलियन मीट्रिक टन तेल के बराबर हाइड्रोकार्बन छिपा हो सकता है। अंडमान बेसिन, जो बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में 2.25 लाख वर्ग किलोमीटर फैला है, भारत के अप्रयुक्त समुद्री बेसिनों का प्रमुख हिस्सा है।
हालांकि, प्रतीक पांडे ने चेतावनी दी कि खोज से व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचने में एक दशक या इससे अधिक समय लग सकता है। प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और पर्यावरणीय मंजूरियों से भरी है।
आयात निर्भरता होगी कम
वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल और 44% प्राकृतिक गैस आयात करता है, जिस पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। इस खोज से अगर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है, तो आयात निर्भरता काफी कम हो जाएगी। मीथेन कोयले और तेल की तुलना में स्वच्छ ईंधन है, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों (नेट-जीरो 2070) को पूरा करने में मदद करेगा।
पुरी ने पहले कहा था कि ऐसी बड़ी खोज भारत की 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। ONGC और OIL जैसी कंपनियां ड्रिलिंग जारी रखेंगी, जबकि सरकार विदेशी निवेशकों और तकनीकी साझेदारों को जोड़ने की तैयारी में है। यह खोज ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा करेगी।