अंकिता भंडारी को मिला इंसाफ, कोर्ट ने मुख्य आरोपी को सुनाई उम्रकैद की सजा, जानिए VIP सर्विस के पीछे का पूरा सच

Edited By Updated: 30 May, 2025 01:44 PM

ankita bhandari got justice

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है। पौड़ी जिले की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य सहित तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

नेशलन डेस्क: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार कोर्ट का बड़ा फैसला आ गया है। पौड़ी जिले की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य सहित तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह वही मामला है जिसने 2022 में पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जब सिर्फ 19 साल की रिसेप्शनिस्ट अंकिता की हत्या एक कथित VIP को "खास सेवा" देने से इनकार करने पर कर दी गई थी। अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई पूरी करते हुए तीनों अभियुक्तों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी माना। इन तीनों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना) और 120बी (षड्यंत्र) के तहत आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार को ₹4 लाख का मुआवजा राज्य सरकार द्वारा दिया जाए।

VIP दबाव से मना किया, जान गंवानी पड़ी

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। यह रिजॉर्ट तत्कालीन बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य का था। जांच में सामने आया कि पुलकित ने अंकिता पर एक VIP मेहमान को "स्पेशल सर्विस" देने का दबाव बनाया था। जब अंकिता ने इसका विरोध किया तो पुलकित ने अपने दो कर्मचारियों के साथ मिलकर उसे मारने की योजना बना ली।

ऐसे हुई थी हत्या

18 सितंबर 2022 को अंकिता अचानक गायब हो गई। परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन शुरुआती कार्रवाई में लापरवाही बरती गई। बाद में जब मामला मीडिया और जनता में उठा, तब राज्य सरकार हरकत में आई और SIT (विशेष जांच टीम) का गठन हुआ। 24 सितंबर को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद किया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसकी मौत पानी में डूबने से बताई गई, लेकिन चोट के निशान और कॉल डिटेल्स से पता चला कि उसे जानबूझकर धक्का दिया गया था।

500 पेज की चार्जशीट और 97 गवाह

एसआईटी ने पुलकित, सौरभ और अंकित के खिलाफ 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने कुल 97 गवाहों की सूची कोर्ट को सौंपी, जिसमें से 47 गवाहों को मुख्य सुनवाई में पेश किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने सभी तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुना दी।

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