Edited By Anu Malhotra,Updated: 04 Nov, 2026 03:01 PM

असम के गुवाहाटी से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, असम इंजीनियरिंग कॉलेज (AEC) के 50 छात्र एक पानी की टंकी का पानी पीने के बाद बीमार पड़ गए। इसी टंकी में एक मरा हुआ बंदर मिला था। यह कॉलेज गुवाहाटी के जालुकबारी इलाके में स्थित...
नई दिल्ली: असम के गुवाहाटी से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, असम इंजीनियरिंग कॉलेज (AEC) के 50 छात्र एक पानी की टंकी का पानी पीने के बाद बीमार पड़ गए। इसी टंकी में एक मरा हुआ बंदर मिला था। यह कॉलेज गुवाहाटी के जालुकबारी इलाके में स्थित है।
52 छात्रों को उल्टी, पेट दर्द और बुखार की शिकायत
पुलिस ने बताया कि यह घटना कॉलेज के हॉस्टल नंबर 7 में हुई। दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद जब छात्र कॉलेज लौटे, तो वे लगातार पानी से बदबू आने की शिकायत कर रहे थे। छात्रों के बीमार पड़ने पर उन्हें सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रणबज्योति बैश्य ने बताया कि लगभग 52 छात्रों को उल्टी, पेट दर्द और बुखार की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था।
प्रिंसिपल ने बताया कि कैजुअल्टी विभाग में छात्रों की जांच की गई और उनका इलाज किया गया। तीन छात्रों को आगे के इलाज के लिए रेफर किया गया। हालांकि, सभी 52 छात्र अब ठीक हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। छात्रों ने बताया कि पानी की टंकी में मरे हुए बंदर के होने का पता रविवार को चला। कई बार शिकायत करने के बाद, छात्रों ने खुद पानी की टंकी की जांच की और उसमें बंदर का शव पाया। छात्रों का दावा है कि उन्होंने हॉस्टल के केयरटेकर से पानी से आ रही बदबू के बारे में शिकायत की थी, लेकिन बार-बार याद दिलाने के बावजूद समस्या बनी रही।
एक छात्र ने बताया कि शुरू में उन्हें लगा कि शायद हॉस्टल में मिलने वाले खाने में कोई दिक्कत है। लेकिन बाद में जब पानी से बदबू आने लगी, तो उन्होंने खुद ओवरहेड पानी की टंकी की जांच की। छात्र के मुताबिक, उन्हें वहां एक बंदर का शव मिला, जो पूरी तरह से सड़ चुका था। छात्र ने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले लोग इसी पानी का इस्तेमाल पीने, नहाने, बर्तन धोने, ब्रश करने और हॉस्टल की मेस में खाना पकाने के लिए कर रहे थे।
40 छात्रों ने पेचिश जैसी बीमारी की शिकायत की
AEC की प्रिंसिपल अमृता गांगुली ने बताया कि पेट से जुड़ी बीमारियों की शिकायतें मिलने के बाद, हॉस्टल प्रशासन ने पानी की टंकी की सफाई करवाई और छात्रों की मेस को दूसरे हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया। प्रिंसिपल ने बताया कि 30 से 40 छात्रों ने पेचिश जैसी बीमारी की शिकायत की थी, जिसके बाद उनकी मेडिकल जांच करवाई गई। उन्होंने कहा कि किसी को भी अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी और अब सभी ठीक हैं। उन्होंने आगे बताया कि सभी छात्र वापस अपनी कक्षाओं में लौट आए हैं।
पानी की टंकी में मिले बंदर के बारे में बात करते हुए, गांगुली ने बताया कि कॉलेज के पीछे एक पहाड़ी है, जहां बंदरों की बड़ी आबादी रहती है। उन्होंने कहा कि बंदरों के झुंड अक्सर भोजन की तलाश में कैंपस में आ जाते हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। उन्होंने हाल ही की एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक छात्र को बंदर ने काट लिया था और उसे रेबीज का इंजेक्शन लगवाना पड़ा था। प्रिंसिपल ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने बंदरों के इस उपद्रव के बारे में वन विभाग को पत्र लिखकर शिकायत की थी।