Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 Feb, 2026 12:54 PM

बिहार के औरंगाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां महज जिज्ञासा और 'जहर का स्वाद' चखने की कोशिश ने चार मासूम जिंदगियों को लील लिया। यह खौफनाक मामला दाउदनगर अनुमंडल के बिगहा गांव का है, जो घटना के कई दिनों बाद अब जाकर दुनिया के...
नेशनल डेस्क: बिहार के औरंगाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां महज जिज्ञासा और 'जहर का स्वाद' चखने की कोशिश ने चार मासूम जिंदगियों को लील लिया। यह खौफनाक मामला दाउदनगर अनुमंडल के बिगहा गांव का है, जो घटना के कई दिनों बाद अब जाकर दुनिया के सामने आया है। दरअसल, 29 जनवरी को 5 नाबालिग सहेलियों ने कौतूहलवश बगुलों को मारने वाला जहर खा लिया था।
इस दुखद हादसे में 12 से 15 साल की उम्र की चार लड़कियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांचवीं लड़की ने समय रहते जहर थूक दिया, जिससे उसकी जान बच गई। शुरुआत में इस मामले को परिजनों द्वारा पूरी तरह छिपा लिया गया था और 4 मृतकों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार भी कर दिया गया, लेकिन गांव में फैली चर्चाओं के बाद जब पुलिस ने जांच शुरू की, तब इस दर्दनाक सच से पर्दा उठा।
जिंदा बची सहेली की जुबानी: मौत का वो भयानक 'टेस्ट'
पुलिस जांच के दौरान जब जीवित बची लड़की से पूछताछ की गई, तो उसने जो कहानी सुनाई वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। लड़की ने बताया कि उसकी एक सहेली उन सभी को पास के एक खेत में ले गई और वहां एक पदार्थ दिखाते हुए कहा कि देखते हैं इसका स्वाद कैसा होता है। जब दूसरी लड़की ने डर जताया कि इसे खाने से मौत भी हो सकती है, तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर उकसाया गया कि "चलो देखते हैं, इसे खाने से मरते हैं या नहीं।"
इसके बाद पांचों ने पानी के साथ उस जहर को निगल लिया। जहर निगलते ही जैसे ही पहली लड़की बेहोश होकर गिरी, पांचवीं लड़की बुरी तरह डर गई और उसने मुंह में मौजूद जहर को तुरंत थूक दिया। वह भागकर घर पहुंची और परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद उसे नीम का घोल पिलाकर उल्टी कराई गई, लेकिन जब तक परिजन खेत पहुंचे, अन्य चार लड़कियां दम तोड़ चुकी थीं।
पुलिसिया जांच और परिजनों के दावों में विरोधाभास
इस मामले में पुलिस और परिजनों के बयानों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। दाउदनगर एसडीपीओ (SDPO) अशोक कुमार दास के अनुसार, प्राथमिक जांच में 'लव एंगल' और पारिवारिक डांट की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि घटना से एक शाम पहले इन लड़कियों को कुछ लड़कों के साथ देखा गया था, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें कड़ी डांट दी थी। पुलिस को संदेह है कि इसी गुस्से और अपमान के कारण लड़कियों ने सामूहिक आत्महत्या जैसा कदम उठाया। हालांकि, लड़कियों के पिताओं ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि लड़कियों ने केवल अनजाने में जहर का स्वाद चखने के चक्कर में अपनी जान गंवाई है।
प्रवासी मजदूरों के परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक चारों लड़कियां बेहद गरीब प्रवासी मजदूर परिवारों से थीं, जो रोजी-रोटी की तलाश में बाहर रहते हैं। इस घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि क्या यह वाकई महज एक खतरनाक 'स्वाद परीक्षण' था या फिर किसी गहरे मानसिक दबाव में उठाया गया आत्मघाती कदम। फिलहाल, पुलिस उस जीवित बची लड़की के बयान और परिस्थितियों के आधार पर मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर वह जहरीला पदार्थ उन बच्चियों के पास पहुंचा कैसे और इस मामले को दबाने के पीछे परिजनों की असल मजबूरी क्या थी।