Edited By Rohini Oberoi,Updated: 12 Apr, 2026 10:56 AM

हायर एजुकेशन के लिए लिया गया मोटा कर्ज अक्सर युवाओं के लिए सालों का बोझ बन जाता है लेकिन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) कलकत्ता की ग्रेजुएट अवनी राठौड़ ने इसे एक चुनौती की तरह लिया। अवनी इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी एक वायरल वीडियो के कारण...
IIM Calcutta Student Success Story : हायर एजुकेशन के लिए लिया गया मोटा कर्ज अक्सर युवाओं के लिए सालों का बोझ बन जाता है लेकिन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) कलकत्ता की ग्रेजुएट अवनी राठौड़ ने इसे एक चुनौती की तरह लिया। अवनी इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी एक वायरल वीडियो के कारण चर्चा में हैं जिसमें उन्होंने खुलासा किया है कि कैसे उन्होंने महज 24 महीनों के भीतर अपना ₹30 लाख का एजुकेशन लोन पूरी तरह चुकता कर दिया।
अवनी का '4-सूत्रीय मास्टरप्लान'
इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में अवनी ने अपनी इस सफलता के पीछे चार मुख्य रणनीतियों का जिक्र किया है। MBA शुरू करने से पहले अवनी ने दो साल तक नौकरी की थी। उन्होंने अपनी फीस और शुरुआती खर्चों के लिए अपनी 'लिक्विड सेविंग्स' का इस्तेमाल किया ताकि लोन की राशि को कम से कम रखा जा सके। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने म्यूचुअल फंड और PPF जैसे निवेशों को हाथ नहीं लगाया। MBA के दौरान उन्होंने एक समर इंटर्नशिप की जिससे उन्हें अच्छी खासी पेमेंट मिली। इस राशि का इस्तेमाल भी उन्होंने लोन के बोझ को कम करने में किया।
दूसरे साल में प्री-प्लेसमेंट ऑफर (PPO) मिलने के बाद अवनी रुकी नहीं। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम काम शुरू किया जिससे होने वाली अतिरिक्त आय सीधे उनकी फीस भरने में काम आई। MBA पूरा करने के बाद जब उनकी फुल-टाइम नौकरी लगी तो उन्होंने अपनी विलासिता (Luxury) पर खर्च करने के बजाय अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा लोन चुकाने में समर्पित कर दिया।
सोशल मीडिया पर बहस: समझदारी या बेवकूफी?
अवनी के इस कदम ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे वित्तीय रूप से गलत बता रहे हैं क्योंकि एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट मिलती है और इसकी ब्याज दर भी कम होती है। इस पर अवनी ने बेहद परिपक्व जवाब दिया। उन्होंने कहा, "पैसे के नजरिए से शायद यह सही न लगे लेकिन मुझे अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए जोखिम लेना था। मैं नहीं चाहती थी कि किसी कर्ज का बोझ मुझे रिस्क लेने से रोके या मुझे दोबारा मजबूरी में नौकरी करने पर मजबूर करे। मानसिक शांति के लिए यह जरूरी था।"