Edited By Sahil Kumar,Updated: 13 Jan, 2026 08:59 PM

PFRDA ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को सुरक्षित और सुनिश्चित पेंशन व्यवस्था बनाने के लिए एक 15-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य NPS के नियमों और दिशानिर्देशों में सुधार कर पेंशनधारकों को बाजार आधारित और कानूनी रूप से...
नेशनल डेस्कः राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत सेवानिवृत्ति के बाद सुनिश्चित और स्थिर आय प्रदान करने के उद्देश्य से पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति NPS के मौजूदा ढांचे के भीतर पेंशनधारकों को बाजार आधारित लेकिन कानूनी रूप से लागू होने वाली सुनिश्चित पेंशन प्रदान करने के लिए नियम और दिशानिर्देश तैयार करेगी।
PFRDA का यह कदम न केवल पेंशनधारकों की रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि यह सरकार के "विकसित भारत 2047" के लक्ष्य से भी जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य हर नागरिक को बुढ़ापे में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।
समिति में कौन-कौन होंगे शामिल?
इस 15-सदस्यीय समिति की अध्यक्षता डॉ. एम. एस. साहू करेंगे, जो कि Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में Dr. Sahoo Regulatory Chambers के संस्थापक हैं। समिति में कानून, एक्चुरियल साइंस, वित्त, बीमा, पूंजी बाजार और अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, PFRDA ने समिति को यह अधिकार भी दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों और मध्यस्थ संस्थाओं को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल कर सके। समिति को Structured Pension Payouts पर एक स्थायी सलाहकार निकाय के रूप में काम करना होगा।
मुख्य उद्देश्य और बदलाव
समिति का मुख्य उद्देश्य NPS में सुनिश्चित पेंशन भुगतान के लिए एक मजबूत नियामकीय ढांचा तैयार करना है, जो 30 सितंबर 2025 को जारी PFRDA के परामर्श पत्र में सुझाई गई पेंशन योजनाओं को लागू कर सके। इस प्रक्रिया में समिति यह सुनिश्चित करेगी कि NPS में निवेश की accumulation अवस्था से पेंशन भुगतान यानी decumulation चरण तक ग्राहकों के लिए प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और बिना रुकावट के हो।
समिति बाजार आधारित गारंटी को कानूनी रूप से लागू करने के तरीकों पर भी विचार करेगी। इसमें novation और settlement जैसे नए कॉन्सेप्ट्स पर मंथन किया जाएगा, ताकि पेंशन भुगतान की विश्वसनीयता बनी रहे। साथ ही, लॉक-इन अवधि, निकासी की सीमाएं, प्राइसिंग मॉडल और सेवा शुल्क जैसे परिचालन पहलुओं की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाएगी।
जोखिम प्रबंधन और ग्राहक हित
समिति का एक प्रमुख कार्य जोखिम प्रबंधन भी होगा। इसके तहत पूंजी और सॉल्वेंसी आवश्यकताओं को तय किया जाएगा, और उन कर पहलुओं की समीक्षा की जाएगी, जिनके तहत पेंशनधारक NPS से बाहर निकले बिना सुनिश्चित पेंशन प्राप्त कर सके। इसके अतिरिक्त, ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक मानकीकृत डिस्क्लोज़र फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, ताकि मिस-सेलिंग को रोका जा सके और पेंशन में assurance तथा market-based guarantee के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझाया जा सके।