वैष्णो देवी से लौट रही ट्रेन में गूंजी किलकारियां, महिला ने स्लीपर क्लास में दिया बच्ची को जन्म...

Edited By Updated: 03 Jan, 2026 08:19 PM

cheers and laughter echoed through the train returning from vaishno devi

चलती ट्रेन में इंसानियत और समझदारी की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। सफर के दौरान ही एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और हालात ऐसे बने कि ट्रेन में ही बच्ची का जन्म कराना पड़ा। यह मामला फरीदाबाद के पास का...

नेशनल डेस्क: चलती ट्रेन में इंसानियत और समझदारी की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। सफर के दौरान ही एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और हालात ऐसे बने कि ट्रेन में ही बच्ची का जन्म कराना पड़ा। यह मामला फरीदाबाद के पास का है, जहां माता वैष्णो देवी कटरा से लौट रही एक महिला ने चलती ट्रेन में ही बच्ची को जन्म दिया। ट्रेन में मौजूद महिलाओं की सूझबूझ और आपसी सहयोग से डिलीवरी सुरक्षित तरीके से कराई गई।

यह घटना 1 जनवरी की है। महिला ट्रेन से अपने घर लौट रही थी, तभी अचानक उसे तेज लेबर पेन शुरू हो गया। समय न होने की वजह से ट्रेन में ही डिलीवरी करानी पड़ी। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं और बाद में उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया गया।

आठ महीने की गर्भवती थी महिला

जानकारी के अनुसार, ट्रेन में बच्ची को जन्म देने वाली महिला की पहचान अभिलाषा के रूप में हुई है। वह अपने पति जवाहरलाल के साथ सफर कर रही थी। दंपति मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के सिटोली गांव का रहने वाला है। महिला आठ महीने की गर्भवती थी और उसकी डिलीवरी समय से पहले हो गई।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना श्री माता वैष्णो देवी कटरा–जबलपुर एक्सप्रेस (11450) में हुई। पति-पत्नी दोनों जम्मू-कश्मीर में रहकर काम करते हैं। डॉक्टरों की सलाह को देखते हुए पति महिला को लेकर गांव लौट रहा था, क्योंकि डिलीवरी कभी भी हो सकती थी।

तुगलकाबाद के बाद बिगड़े हालात

शुक्रवार दोपहर ट्रेन दिल्ली पहुंची, जहां महिला को हल्का दर्द महसूस होने लगा। लेकिन तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन पार करते ही दर्द अचानक तेज हो गया और महिला की हालत बिगड़ने लगी। पत्नी की हालत देखकर पति ने घबराकर आसपास मौजूद महिलाओं से मदद मांगी।

S-5 कोच में मौजूद महिलाओं ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। उन्हें समझ आ गया कि डिलीवरी का वक्त आ चुका है। इसके बाद यात्रियों की मदद से सीटों के आसपास जगह बनाई गई और बाकी लोगों को दूसरी ओर भेज दिया गया।

चादर-कंबल से बना पर्दा, ट्रेन में ही डिलीवरी

महिलाओं ने अपने पास मौजूद चादर, शॉल और कंबल इकट्ठा कर पर्दा बनाया, ताकि महिला को निजता मिल सके। कुछ अनुभवी महिलाओं की मदद से चलती ट्रेन में ही सुरक्षित डिलीवरी कराई गई और महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया।

डिलीवरी होते ही यात्रियों ने तुरंत रेलवे को सूचना दी। किसी यात्री ने रेलवे कंट्रोल रूम में कॉल कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, जिसके बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आया।

फरीदाबाद स्टेशन पर रोकी गई ट्रेन

सूचना मिलते ही ट्रेन को ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर रोका गया। ट्रेन करीब 26 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। रेलवे मेडिकल की महिला स्टाफ मौके पर पहुंची और मां व नवजात बच्ची की जांच की।

इसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की महिला पुलिसकर्मियों की मदद से मां और बच्ची को एंबुलेंस के जरिए बीके अस्पताल पहुंचाया गया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस पूरे घटनाक्रम में ट्रेन में सफर कर रही महिलाओं की सूझबूझ, साहस और इंसानियत ने एक बड़ी भूमिका निभाई, जो वाकई काबिल-ए-तारीफ है।

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