दिल्ली बजट 2026: CM रेखा गुप्ता ने डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर्स और अन्य गिग वकर्स से की मुलाकात

Edited By Updated: 20 Mar, 2026 02:15 PM

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दिल्ली के आगामी बजट से पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर्स और अन्य गिग वर्कर्स (Gig Workers) के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद किया। 23 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इन श्रमिकों की...

नेशनल डेस्क: दिल्ली के आगामी बजट से पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवर्स और अन्य गिग वर्कर्स (Gig Workers) के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद किया। 23 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इन श्रमिकों की समस्याओं को समझना और उन्हें बजट में शामिल करना था।

वर्कस ने रखी ये मांग

बैठक में श्रमिकों ने सबसे प्रमुख मांग 'एम्प्लॉई स्टेटस' (Employee Status) को लेकर उठाई। वर्कर्स का कहना है कि उन्हें कंपनियों द्वारा 'पार्टनर' कहा जाता है, जिससे उन्हें पीएफ (PF), ईएसआई (ESI) और जॉब सिक्योरिटी जैसे लाभ नहीं मिलते।  श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कंपनियों के एल्गोरिदम के साथ छेड़छाड़ की जाती है, जिससे उनकी कमाई प्रभावित होती है। यदि उन्हें कर्मचारी का दर्जा मिले, तो 90% समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।

महिला वर्कर्स के लिए विशेष नीतियां

डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काम कर रही महिलाओं ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी बुनियादी जरूरतें रखीं:

  • मैटरनिटी बेनिफिट: महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ और विशेष नीतियों की मांग की गई।

  • रेस्ट स्टॉप्स: पूरी दिल्ली में डिलीवरी पार्टनर्स के लिए विश्राम गृह (Rest Stops) बनाने का सुझाव दिया गया।

  • EV चार्जिंग स्टेशन: ई-स्कूटर चलाने वाली महिला वर्कर्स ने मेट्रो स्टेशनों पर चार्जिंग पॉइंट्स की सुविधा देने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह हमारी सरकार का दूसरा बजट है। हम समाज के हर वर्ग से सुझाव ले रहे हैं ताकि दिल्ली के विकास का रोडमैप जन-भागीदारी से तैयार हो सके। जनता की भागीदारी ही इस बजट की सबसे बड़ी ताकत है।"

संसदीय समिति की सिफारिशें

इसी बीच, बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भी गिग वर्कर्स के लिए कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है:

  • e-Shram पोर्टल: सभी गिग वर्कर्स का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए।

  • कंपनियों की जिम्मेदारी: एग्रीगेटर कंपनियों (Zomato, Swiggy, Ola आदि) की जवाबदेही तय हो।

  • सामाजिक सुरक्षा: दुर्घटना की स्थिति में ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (PF) का लाभ समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए।

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