शिक्षक नहीं करेंगे कुत्तों की गिनती! दिल्ली सरकार ने अफवाहों को किया खारिज, जानें क्या है नया आदेश

Edited By Updated: 29 Dec, 2025 06:41 PM

delhi government denies reports of teachers counting stray dogs

दिल्ली सरकार ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि सरकारी शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती का काम सौंपा गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिक्षा निदेशालय ने केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्कूल परिसर को...

नेशनल डेस्क : दिल्ली में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती कराने की खबरों के बाद हंगामा मचा था। इस पर दिल्ली सरकार ने अपना रुख साफ किया है और ऐसी खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और न ही शिक्षकों को इस तरह की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सर्कुलर का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में आवारा कुत्तों से आम जनता और विशेष रूप से छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर शिक्षा निदेशालय ने एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर का मुख्य उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि स्कूल परिसरों में कोई भी आवारा कुत्ता मौजूद न हो, ताकि छात्रों की सुरक्षा पर कोई खतरा न आए। बताया जा रहा है कि यह निर्देश छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही जारी किया गया था।

नोडल अधिकारी नियुक्त करने की व्यवस्था
दिल्ली सरकार के सूत्रों ने यह भी बताया कि छात्रों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए स्कूलों को अपने शिक्षकों में से एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए कहा गया था। इस अधिकारी की जिम्मेदारी स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखना और किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित विभागों से समन्वय करना है। लेकिन यह जानकारी गलत तरीके से प्रकाशित हो गई और इसे शिक्षकों से गिनती कराने का कार्य जोड़ दिया गया। जबकि वास्तव में सरकार ने ऐसा कोई आदेश कभी जारी नहीं किया।

शिक्षक संघ का विरोध
राजधानी के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर लावारिस कुत्तों की गिनती करने का काम सौंपे जाने की खबर पर शिक्षक संघ ने भी विरोध जताया है। शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षक का मुख्य कार्य शिक्षा देना और छात्रों को बेहतर सीख प्रदान करना है, न कि इस तरह के कार्य करना। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों को उनके योगदान और सम्मान के अनुसार काम सौंपा जाना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से इस मामले में शिक्षकों को अनावश्यक जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है।

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