ड्राइविंग लाइसेंस हो जाएगा रद्द, भूलकर भी न करें ये गलती, सरकार ने लागू किया नया नियम

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 09:44 PM

driving licenses will also be suspended for repeated offenses

सड़क सुरक्षा को और सख्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि यदि कोई ड्राइवर एक साल में पांच या उससे अधिक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो...

नेशनल डेस्क: सड़क सुरक्षा को और सख्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि यदि कोई ड्राइवर एक साल में पांच या उससे अधिक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकेगा। यह नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है।

सरकार का उद्देश्य हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट की अनदेखी करना, रेड लाइट तोड़ना जैसी आम लेकिन खतरनाक लापरवाहियों पर सख्ती दिखाना और लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करना है।

पहले सिर्फ चालान, अब सख्त कार्रवाई

अब तक ऐसे मामलों में केवल चालान काटकर मामला खत्म हो जाता था, लेकिन नए नियमों के तहत बार-बार नियम तोड़ना गंभीर अपराध माना जाएगा। इससे पहले ड्राइविंग लाइसेंस का सस्पेंशन केवल ओवरस्पीडिंग, वाहन चोरी या यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार जैसे गंभीर मामलों में ही होता था। अब छोटी-छोटी गलतियां भी अगर लगातार की गईं, तो उनका सीधा असर लाइसेंस पर पड़ेगा।

हालांकि राहत की बात यह है कि पुराने चालान नए साल के रिकॉर्ड में नहीं जोड़े जाएंगे। हर कैलेंडर ईयर यानी 1 जनवरी से नए उल्लंघनों की गिनती शुरू होगी, जिससे ड्राइवरों को अपनी आदतें सुधारने का मौका मिलेगा।

सस्पेंशन से पहले सुनवाई अनिवार्य

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले संबंधित ड्राइवर को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। बिना सुनवाई के कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

टोल बकाया पर भी सख्ती

नियमों में संशोधन के तहत टोल वसूली को लेकर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। अगर किसी वाहन पर टोल बकाया है, तो न तो उसे बेचा जा सकेगा, न ही दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा सकेगा। यहां तक कि उस वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट भी रिन्यू नहीं होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम बिना बैरियर वाले फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम की दिशा में एक बड़ी पहल है, जो पूरी तरह डिजिटल ट्रैकिंग पर आधारित होगा। इससे राजस्व का नुकसान रुकेगा और ट्रैफिक का प्रवाह भी बेहतर होगा।

दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में सीसीटीवी और ई-चालान के जरिए निगरानी पहले ही तेज कर दी गई है। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सरकार की यह पहल अब ड्राइवरों के लिए साफ संदेश है- लापरवाही अब महंगी पड़ सकती है।

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