‘श्री सत्य योग फाउंडेशन’ आश्रम में नकली नोट छापने का चल रहा था कारोबार, पकड़ा 2 करोड़ का जाली नोटों का जखीरा

Edited By Updated: 19 Mar, 2026 03:51 PM

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गुजरात में नकली नोटों के काले कारोबार के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक की सबसे चौंकाने वाली कार्रवाई की है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो एक आध्यात्मिक आश्रम की आड़ में देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने की साजिश रच...

अहमदाबाद: गुजरात में नकली नोटों के काले कारोबार के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक की सबसे चौंकाने वाली कार्रवाई की है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो एक आध्यात्मिक आश्रम की आड़ में देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने की साजिश रच रहा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की फर्जी करेंसी के साथ एक महिला समेत 6 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

योग केंद्र के भीतर चल रहा था अधर्म का खेल
इस पूरे मामले का सबसे विचलित करने वाला पहलू इसका सूरत कनेक्शन है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि सूरत के कामरेज तालुका स्थित धोरण पारडी गांव का ‘श्री सत्य योग फाउंडेशन’ इस अवैध धंधे का मुख्य केंद्र था। जो जगह लोगों को शांति और अध्यात्म का पाठ पढ़ाने के लिए बनी थी, उसके भीतर हाई-टेक मशीनों से 500 रुपये के नकली नोट छापे जा रहे थे। बाहरी दुनिया के लिए यह एक योग केंद्र था, लेकिन चारदीवारी के भीतर जाली नोटों का बड़ा कारखाना चल रहा था।

'एक का तीन' वाला लालच- 500 रुपये के करीब 40 हजार नोट बरामद
क्राइम ब्रांच को खुफिया जानकारी मिली थी कि सूरत से नकली नोटों की एक बड़ी खेप अहमदाबाद भेजी जा रही है। सक्रिय हुई पुलिस टीम ने अमराईवाड़ी इलाके में जाल बिछाया और संदिग्धों को धर दबोचा। तलाशी के दौरान उनके पास से 500 रुपये के करीब 40 हजार नोट बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने अपनी मोडस ऑपरेंडी (काम करने का तरीका) का खुलासा करते हुए बताया कि वे बाजार में "एक के बदले तीन" का लालच दे रहे थे। उनका प्लान था कि 66 लाख रुपये की असली मुद्रा के बदले वे लोगों को 2 करोड़ रुपये के नकली नोट थमा देंगे।

छापेमारी में मिला आधुनिक सेटअप
अहमदाबाद में हुई गिरफ्तारियों के बाद जब पुलिस की टीम सूरत स्थित आश्रम और अन्य ठिकानों पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। वहां से नोट छापने वाली अत्याधुनिक प्रिंटिंग मशीनें, विशेष किस्म का कागज, कंप्यूटर सिस्टम और स्याही बरामद की गई। हैरानी की बात यह है कि इस गैरकानूनी काम के परिवहन के लिए आश्रम की गाड़ियों का ही इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि किसी को शक न हो। बरामद नोटों की संख्या इतनी अधिक थी कि उनके सीरियल नंबर दर्ज करने की प्रक्रिया में पुलिस को कई घंटों तक पसीना बहाना पड़ा।

देशव्यापी नेटवर्क बनाने की थी तैयारी
प्रारंभिक तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं रहना चाहता था। आरोपियों की योजना देशभर में एजेंटों का एक जाल बुनने की थी, जिन्हें मोटे कमीशन का लालच देकर इस गोरखधंधे में शामिल किया जाना था। फिलहाल, पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस रैकेट के पीछे कौन से बड़े 'सफेदपोश' चेहरे शामिल हैं और क्या इनके तार अन्य राज्यों या सरहद पार से भी जुड़े हैं। इस खुलासे ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है और धार्मिक संस्थाओं की गतिविधियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


 

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