Edited By Radhika,Updated: 04 Feb, 2026 02:53 PM

सूर्य की सतह पर मची हलचल ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को अलर्ट पर रख दिया है। एक विशालकाय सनस्पॉट, जिसे रीजन 4366 (AR4366) नाम दिया गया है, वर्तमान में Solar Flares की 'फैक्ट्री' बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में इसने कई शक्तिशाली विस्फोट किए हैं, जो...
Solar Storm: सूर्य की सतह पर मची हलचल ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को अलर्ट पर रख दिया है। एक विशालकाय सनस्पॉट, जिसे रीजन 4366 (AR4366) नाम दिया गया है, वर्तमान में Solar Flares की 'फैक्ट्री' बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में इसने कई शक्तिशाली विस्फोट किए हैं, जो धरती के संचार और बिजली प्रणालियों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
क्या है रीजन 4366?
यह सूर्य की सतह पर उभरा एक बेहद गहरा और अस्थिर चुंबकीय क्षेत्र है। इसकी डरावनी बात यह है कि इसका आकार 1859 के ऐतिहासिक 'कैरिंगटन इवेंट' (इतिहास का सबसे बड़ा सौर तूफान) वाले सनस्पॉट के आधे के बराबर पहुँच गया है। यह सनस्पॉट इतनी तेज़ी से बढ़ा है कि अब यह पृथ्वी के ठीक सामने आ गया है।
X8.1 श्रेणी का सबसे बड़ा विस्फोट
रविवार, 1 फरवरी 2026 को इस सनस्पॉट से X8.1 श्रेणी की एक विशाल सौर ज्वाला निकली। यह पिछले दो सालों का सबसे बड़ा सौर विस्फोट माना जा रहा है। X-क्लास की ज्वालाएं सबसे शक्तिशाली होती हैं और इनके कारण दक्षिण प्रशांत क्षेत्र (ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) में रेडियो ब्लैकआउट भी दर्ज किया गया है।

धरती पर क्या होगा असर?
विस्फोट के साथ सूर्य से प्लाज्मा का एक बादल निकला है, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सौर तूफान 5 फरवरी 2026 की देर रात या 6 फरवरी को धरती से टकरा सकता है। इसके टकराने से जीपीएस (GPS), सैटेलाइट सिग्नल और रेडियो संचार में रुकावट आ सकती है। सुखद पहलू यह है कि इस तूफान के कारण धरती के आसमान में नॉर्दर्न लाइट्स (Aurora) दिखाई दे सकती हैं। लद्दाख जैसे इलाकों में भी आसमान लाल या हरा हो सकता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
NASA के अनुसार, सूर्य इस समय अपने 11 साल के चक्र के सबसे सक्रिय दौर (Solar Maximum) से गुजर रहा है। यह दौर 2026 तक जारी रह सकता है, जिसका अर्थ है कि आने वाले महीनों में हमें ऐसे और भी शक्तिशाली सौर तूफान देखने को मिल सकते हैं।