Edited By Radhika,Updated: 03 Jan, 2026 11:34 AM

कड़ाके की ठंड के बीच जलवायु वैज्ञानिकों ने इस साल को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। ताजा वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक इस साल मानसून के दूसरे हिस्से में अल-नीनो (El Nino) के एक्टिव होने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो भारत को न केवल कमजोर...
नेशनल डेस्क: कड़ाके की ठंड के बीच जलवायु वैज्ञानिकों ने इस साल को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। ताजा वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक इस साल मानसून के दूसरे हिस्से में अल-नीनो (El Nino) के एक्टिव होने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो भारत को न केवल कमजोर मानसून का सामना करना पड़ सकता है, बल्कि गर्मी के भी नए रिकॉर्ड टूट सकते हैं।
मानसून पर मंडराता खतरा: क्या कहते हैं आंकड़े?
अमेरिका की नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने 29 दिसंबर 2025 को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जुलाई से सितंबर 2026 के बीच अल-नीनो बनने की 48 % संभावना है। वहीं IMD के शुरुआती अनुमान भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि जून-जुलाई की अवधि के बाद अल-नीनो जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा के अनुसार, "ये शुरुआती संकेत हैं। स्थिति आने वाले महीनों में अधिक स्पष्ट होगी, लेकिन मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो का उभरना चिंता का विषय है।"
कृषि और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
भारत के लिए यह खबर इसलिए डराने वाली है क्योंकि देश की 51 % कृषि भूमि आज भी बारिश पर निर्भर है। कुल कृषि उत्पादन का 40 % हिस्सा इन्हीं इलाकों से आता है और देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर खेती से जुड़ी है। मानसून में थोड़ी सी भी कमी का मतलब है—अनाज की पैदावार में गिरावट और बढ़ती महंगाई।
2026 में क्या पिछला रिकॉर्ड टूटेगा?
विशेषज्ञों ने 2023-24 के उस अल-नीनो दौर की याद दिलाई है जिसने दुनिया भर में भीषण गर्मी पैदा की थी। कोपर्निकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक तब वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.64 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था। जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल का मानना है कि मानव-जनित Climate Change और अल-नीनो का संगम 2026 को 2025 के मुकाबले कहीं ज्यादा गर्म बना सकता है। फिलहाल अगले एक-दो महीनों तक 'ला-नीना' के बने रहने की उम्मीद है, लेकिन साल के मध्य से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल सकता है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि हमें पानी की बचत और खेती की रणनीति में अभी से बदलाव करने की जरूरत है।