Edited By Mehak,Updated: 24 Jan, 2026 05:46 PM

ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और मोबाइल लेनदेन ने जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन ठगों के लिए नए रास्ते भी खोल दिए हैं। मिस्ड कॉल, फर्जी मैसेज या नकली कस्टमर केयर नंबर से मिनटों में अकाउंट खाली हो सकता है। ऐसे में तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करना जरूरी है। कॉल करने...
नेशनल डेस्क : डिजिटल लेनदेन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। मोबाइल फोन, UPI और ऑनलाइन बैंकिंग ने जहां रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं ठगों को लोगों को फंसाने के नए तरीके भी मिल गए हैं। आज एक मिस्ड कॉल, फर्जी मैसेज या नकली कस्टमर केयर नंबर के जरिए मिनटों में बैंक अकाउंट खाली किया जा सकता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि ठगी का शक होते ही लोग घबरा जाते हैं और सही कदम उठाने में देर कर देते हैं। इसी देरी का फायदा उठाकर ठगी की रकम कई खातों में ट्रांसफर हो जाती है। ऐसे में सही जानकारी और तुरंत कार्रवाई आपकी मेहनत की कमाई बचा सकती है।
ठगी होते ही तुरंत 1930 पर करें कॉल
अगर आपको जरा सा भी लगे कि आप साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए हैं, तो बिना वक्त गंवाए 1930 नंबर पर कॉल करें। यह भारत सरकार की नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन है, जो 24 घंटे काम करती है। कॉल करते ही आपकी शिकायत दर्ज की जाती है और संबंधित बैंक या पेमेंट ऐप को अलर्ट भेजा जाता है, ताकि ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से पहले रोका जा सके। शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन की जानकारी, मोबाइल नंबर, बैंक का नाम और ठगी का तरीका स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है। इसके अलावा आप cybercrime.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं, जिससे मामले में कार्रवाई और तेज हो जाती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
ज्यादातर साइबर फ्रॉड एक जैसे तरीकों से किए जाते हैं। कोई खुद को बैंक कर्मचारी बताकर ओटीपी मांगता है, कोई रिफंड या केवाईसी अपडेट के नाम पर लिंक भेजता है। ध्यान रखें, कोई भी बैंक या सरकारी संस्था फोन या मैसेज पर OTP, पिन या पासवर्ड नहीं मांगती। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह कितना भी असली क्यों न लगे। फोन में किसी को रिमोट एक्सेस न दें और सोशल मीडिया पर दिखने वाले फ्री गिफ्ट या भारी छूट वाले ऑफर से भी सावधान रहें। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।