Edited By Anu Malhotra,Updated: 01 Apr, 2026 03:45 PM

New Tax Regime: 1 अप्रैल 2026 से देश के इनकम टैक्स नियमों में बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपकी सालाना कमाई 15 लाख रुपये है, तो अब आपके पास टैक्स बचाने के दो रास्ते हैं। सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को अब...
New Tax Regime: 1 अप्रैल 2026 से देश के इनकम टैक्स नियमों में बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपकी सालाना कमाई 15 लाख रुपये है, तो अब आपके पास टैक्स बचाने के दो रास्ते हैं। सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को अब डिफ़ॉल्ट बना दिया है, लेकिन पुरानी व्यवस्था (Old Tax Regime) भी अभी खत्म नहीं हुई है। आइए समझते हैं कि आपकी जेब के लिए क्या बेहतर है।
नई टैक्स व्यवस्था: कम झंझट, ज्यादा बचत
नए नियमों के अनुसार, अब ₹12.75 लाख तक की सालाना सैलरी पर आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा। इसमें ₹12 लाख की आय पर मिलने वाली टैक्स छूट (रिबेट) और ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल है।
अगर आपकी सैलरी 15 लाख रुपये है, तो गणित कुछ ऐसा होगा:
आपकी कुल आय में से ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद ₹14.25 लाख पर टैक्स गिना जाएगा। स्लैब के हिसाब से आपका कुल टैक्स ₹97,500 (सेस मिलाकर) बनेगा। इसमें आपको कोई निवेश दिखाने की जरूरत नहीं है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था: निवेश करने वालों का सहारा
पुरानी व्यवस्था अभी भी उन 12% लोगों की पसंद बनी हुई है जिन्होंने होम लोन ले रखा है या जो LIC, PPF और बच्चों की फीस जैसे बड़े निवेश करते हैं। अगर आप 15 लाख की सैलरी पर कोई निवेश नहीं दिखाते, तो पुरानी व्यवस्था में आपको करीब ₹2,57,400 का भारी-भरकम टैक्स देना पड़ सकता है।
हालांकि, अगर आप चतुराई से निवेश करते हैं-जैसे ₹1.5 लाख (80C), ₹50,000 (NPS), ₹2 लाख (होम लोन ब्याज) और मेडिकल इंश्योरेंस—तो आप अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम कर सकते हैं। सारे निवेश और छूट घटाने के बाद, अगर आपकी टैक्स योग्य आय 10 लाख तक आ जाती है, तो आपका टैक्स ₹1.17 लाख के आसपास बनेगा।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 88% सैलरीड क्लास के लोग अब 'न्यू टैक्स रिजीम' को अपना चुके हैं क्योंकि इसमें बिना किसी निवेश के ही टैक्स काफी कम लग रहा है। 15 लाख की सैलरी वाले व्यक्ति के लिए आज की तारीख में नई टैक्स व्यवस्था ही ज्यादा फायदेमंद नजर आ रही है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर लगभग ₹20,000 की अतिरिक्त बचत हो रही है (पुरानी व्यवस्था के मुकाबले)।