जंग में बिना शामिल हुए ही बड़ी कीमत चुका रहा भारत, 4 दिन के युद्ध में इतने करोड़ का हो गया नुकसान

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 05:11 PM

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारत पर भी दिख रहा है। केवल चार दिनों में तेल की बढ़ती कीमत और रुपये की कमजोरी से लगभग 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। भारत प्रतिदिन 50 लाख बैरल तेल आयात करता है, और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट...

नेशनल डेस्क : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़े संघर्ष, का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। भारत कच्चे तेल के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से देश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अनुमान है कि केवल चार दिनों में ही करीब 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ चुका है।

तेल की कीमत बढ़ने से कितना नुकसान?

भारत प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है। अगर तेल की कीमत औसतन 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ती है, तो भारत को हर दिन लगभग 50 मिलियन डॉलर अतिरिक्त चुकाने पड़ते हैं। यदि 1 डॉलर की कीमत लगभग 91 रुपये मानी जाए, तो यह करीब 455 करोड़ रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त खर्च बनता है। इस हिसाब से चार दिनों में केवल तेल महंगा होने के कारण लगभग 1,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ बढ़ चुका है।

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रुपये की गिरावट का असर

तेल महंगा होने के साथ-साथ रुपये में कमजोरी भी भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत का सालाना तेल आयात बिल करीब 160 अरब डॉलर के आसपास है। यदि डॉलर के मुकाबले रुपया 1 रुपये गिरता है, तो सालाना करीब 16,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ता है। चार दिनों के हिसाब से देखें तो यह रोजाना करीब 44 करोड़ रुपये और चार दिनों में लगभग 175–180 करोड़ रुपये का अतिरिक्त असर डाल सकता है।

कुल मिलाकर कितना बढ़ा बोझ?

तेल की बढ़ती कीमत और रुपये की गिरावट को मिलाकर देखा जाए, तो केवल चार दिनों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक दबाव भारत पर पड़ चुका है।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर उन देशों पर ज्यादा पड़ता है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। समुद्री और हवाई मार्गों में अनिश्चितता बढ़ने से कार्गो की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे आयात-निर्यात पर असर पड़ता है।

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आगे क्या चुनौतियां?

यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत को महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला और सरकारी वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को वैकल्पिक तेल आपूर्ति स्रोत, रणनीतिक भंडारण और मुद्रा स्थिरता जैसे कदमों पर ध्यान देना होगा, ताकि संभावित आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।

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