Edited By Rohini Oberoi,Updated: 19 Jan, 2026 12:13 PM

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आपकी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाएगा। शहर के मशहूर सराफा बाजार में सालों से फटेहाल स्थिति में भीख मांग रहे एक बुजुर्ग की असलियत जब सामने आई तो पुलिस और प्रशासन के...
नेशनल डेस्क। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आपकी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाएगा। शहर के मशहूर सराफा बाजार में सालों से फटेहाल स्थिति में भीख मांग रहे एक बुजुर्ग की असलियत जब सामने आई तो पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी दंग रह गए। जिस व्यक्ति को लोग लाचार समझकर पैसे देते थे वह असल में करोड़पति निकला।
कैसे हुआ इस अमीर भिखारी का पर्दाफाश?
इंदौर के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत टीम ने मांगीलाल नाम के एक बुजुर्ग को रेस्क्यू किया। शुरुआती पूछताछ में लगा कि वह बेसहारा है लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी मांगीलाल की अकूत संपत्ति की परतें खुलती गईं। मांगीलाल लकड़ी की एक फिसलन वाली गाड़ी (स्केट) पर बैठकर, पीठ पर बैग लटकाकर लोगों की सहानुभूति बटोरता था। वह रोजाना भीख से 500 से 1000 रुपये कमा लेता था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मांगीलाल भीख से मिले पैसों को सराफा के व्यापारियों को ब्याज (Interest) पर उधार देता था। वह हर रोज बाजार केवल भीख मांगने नहीं बल्कि अपना ब्याज वसूलने भी आता था।

संपत्ति का साम्राज्य: मकान, ऑटो और लग्जरी कार
नगर निगम और विभाग की जांच में मांगीलाल की जो संपत्ति सामने आई वह किसी रईस बिजनेसमैन जैसी है:
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तीन पक्के मकान: भगत सिंह नगर में एक तीन मंजिला आलीशान मकान, शिवनगर में 600 वर्गफुट का घर और अलवास में एक अतिरिक्त मकान।
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वाहनों का काफिला: मांगीलाल के पास तीन ऑटो रिक्शा हैं जिन्हें उसने किराए पर चला रखा है।
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ड्राइवर के साथ कार: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मांगीलाल के पास एक डिजायर कार है और उसे चलाने के लिए उसने बकायदा एक निजी ड्राइवर भी रखा हुआ है।
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इंदौर में भिक्षावृत्ति के खिलाफ बड़ा अभियान
इंदौर प्रशासन शहर को भिखारी-मुक्त बनाने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने बताया कि फरवरी 2024 से अब तक के सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं:
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कुल भिखारी: 6,500 लोगों की पहचान की गई।
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काउंसलिंग: 4,500 लोगों को भीख छोड़ने के लिए तैयार किया गया।
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पुनर्वास: 1,600 लोगों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा गया।
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बच्चों का भविष्य: भीख मांगते पाए गए 172 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया।
प्रशासन की चेतावनी
नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि इंदौर में भीख मांगना या बच्चों से जबरन भीख मंगवाना अपराध है। मांगीलाल जैसे संपन्न लोगों द्वारा लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने के मामलों को देखते हुए प्रशासन अब भिखारियों की नेटवर्थ और उनकी बैंक डिटेल्स की भी जांच कर रहा है।