Edited By Ramanjot,Updated: 29 Jan, 2026 09:35 PM

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने खादी उद्योग और बुनकरों को मजबूती देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने तय किया है कि करीब पांच लाख सरकारी कर्मचारी हर महीने के पहले शनिवार को खादी से बने कपड़े पहनेंगे।
नेशनल डेस्क: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने खादी उद्योग और बुनकरों को मजबूती देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने तय किया है कि करीब पांच लाख सरकारी कर्मचारी हर महीने के पहले शनिवार को खादी से बने कपड़े पहनेंगे। यह व्यवस्था 24 अप्रैल 2026 से लागू होगी, जो कि सिविल सर्विस डे के रूप में मनाया जाता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से खादी की मांग बढ़ेगी और इससे जुड़े कारीगरों और बुनकरों को सीधा फायदा मिलेगा।
यह निर्णय मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। नया नियम केवल सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ बोर्ड, कॉर्पोरेशन, विश्वविद्यालय, प्राधिकरण और अनुदानित संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार पुरुष कर्मचारियों को खादी की शर्ट, पैंट या ओवरकोट पहनना होगा, जबकि महिला कर्मचारी खादी की साड़ी या चूड़ीदार पहन सकेंगी। हालांकि कर्मचारी संघ ने साफ किया है कि खादी पहनना पूरी तरह अनिवार्य नहीं है, बल्कि इसे स्वैच्छिक रखा गया है। इसके बावजूद संघ ने बुनकरों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार की अपील का समर्थन किया है।
कर्नाटक स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.एस. शदाक्षरी ने बताया कि पहले सरकार हर शुक्रवार को खादी पहनने की योजना पर विचार कर रही थी, लेकिन कर्मचारियों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ न पड़े, इसलिए इसे महीने में सिर्फ एक दिन तक सीमित किया गया। इससे कर्मचारियों पर दबाव भी नहीं पड़ेगा और खादी उद्योग को भी सहारा मिलेगा।
सरकारी कर्मचारियों को खादी के कपड़े राज्य की सरकारी खादी ग्रामोद्योग मंडलियों की दुकानों से खरीदने होंगे। खास बात यह है कि इन दुकानों से खरीदारी करने पर कर्मचारियों को पांच प्रतिशत अतिरिक्त छूट भी दी जाएगी, जिससे खादी कपड़े अपेक्षाकृत सस्ते मिल सकेंगे।
सरकार का कहना है कि यह फैसला सिर्फ ड्रेस कोड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय में सुधार करना और खादी को फिर से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ना है।