हिमाचल का कसोल बना कूड़े का पहाड़, वायरल वीडियो ने उठाए प्रशासन और पर्यटकों पर गंभीर सवाल

Edited By Updated: 30 May, 2025 01:21 PM

kasol became a mountain of garbage

हिमाचल प्रदेश का कसोल जिसे कभी "मिनी इजराइल" और "प्राकृतिक स्वर्ग" कहा जाता था, अब प्लास्टिक और कचरे के ढेर में तब्दील होता दिख रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो वायरल हुआ

नेशलन डेस्क: हिमाचल प्रदेश का कसोल जिसे कभी "मिनी इजराइल" और "प्राकृतिक स्वर्ग" कहा जाता था, अब प्लास्टिक और कचरे के ढेर में तब्दील होता दिख रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कसोल के एक जंगल में चारों तरफ फैला प्लास्टिक और कूड़ा-करकट नजर आता है। यह वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया है। इस वीडियो में एक व्यक्ति को कैमरे के साथ इलाके की हालत पर दुख जताते हुए देखा जा सकता है। वह कहते हैं, “बहुत गंदी बदबू आ रही है। पहले कैसा था और अब देखो कैसा है।” जैसे-जैसे कैमरा कचरे से भरे इलाके को घूमता है, प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें और अन्य कचरा साफ-साफ नजर आता है। उस व्यक्ति ने इस दृश्य को “घिनौना” बताया और प्रशासन से तुरंत सफाई की अपील की।

BJP has shared videos showcasing the worsening condition of tourist destinations in Himachal Pradesh, such as #Kasol valley, which as per claims is getting turned into garbage dumps under Congress governance #HimanchalPradesh pic.twitter.com/cQ1L5ZugWG

— Saffron Force 🇮🇳 (@SaffronForceInd) May 28, 2025

सोशल मीडिया पर उठा गुस्से का तूफान

वीडियो के वायरल होते ही हजारों लोगों ने इसे देखा और प्रतिक्रिया दी। जहां कुछ ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया वहीं कई यूजर्स ने पर्यटकों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों को कसोल की दुर्दशा का कारण बताया। एक यूजर ने लिखा, “कसोल नगर निगम के अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए, उन्होंने स्वर्ग को नर्क में बदल दिया है।” दूसरे ने कहा, “@INCHimachal ही नहीं, आम लोगों की भी जिम्मेदारी है। आप देखने तो स्वर्ग आते हैं लेकिन छोड़ जाते हैं गंदगी।” तीसरे यूजर ने सीधा संदेश दिया, “कसोल को साफ रखें, अपना कचरा वापस ले जाएं। हिमाचल का सम्मान करें।”

प्रशासन और आम नागरिक, दोनों कटघरे में

यह वीडियो न केवल एक पर्यावरणीय चिंता का विषय है बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता और नागरिकों की कमी हुई जिम्मेदारी का संकेत भी है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रीन टैक्स वसूलने के बावजूद सरकार ने इन स्थलों की सफाई और संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। एक यूजर ने तीखी टिप्पणी की, “जब एक अजेय शक्ति (नागरिक भावना की कमी) एक अचल वस्तु (कामचोर प्रशासन) से मिलती है तो यह परिणाम होता है।”

पर्यटन के साथ पर्यावरण को बचाना जरूरी

कसोल सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में बसा एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है। यहां हर साल हजारों देसी और विदेशी सैलानी पहुंचते हैं। लेकिन साफ-सफाई के प्रति उनकी लापरवाही और प्रशासन की नाकामी इस क्षेत्र की खूबसूरती को धीरे-धीरे नष्ट कर रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले मानसून में यही कचरा नदियों में बह जाएगा और इससे गंभीर प्रदूषण और जल संकट खड़ा हो सकता है।

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