Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Feb, 2026 07:04 PM

लिवर हमारे शरीर का 'इंजन' है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रगों में दौड़ने वाला खून का प्रकार (Blood Group) इस इंजन की उम्र और सेहत तय कर सकता है? हालिया शोध ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है जो सीधे तौर पर आपके ब्लड ग्रुप और लिवर की गंभीर...
नेशनल डेस्क: लिवर हमारे शरीर का 'इंजन' है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रगों में दौड़ने वाला खून का प्रकार (Blood Group) इस इंजन की उम्र और सेहत तय कर सकता है? हालिया शोध ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है जो सीधे तौर पर आपके ब्लड ग्रुप और लिवर की गंभीर बीमारियों के बीच संबंध बताता है। लिवर की बीमारियां अक्सर 'साइलेंट किलर' होती हैं क्योंकि इनके लक्षण शुरुआती दौर में महसूस नहीं होते। जर्नल 'फ्रंटियर्स' में प्रकाशित एक नवीनतम अध्ययन के अनुसार, हमारा ब्लड ग्रुप केवल खून चढ़ाने (Transfusion) के काम ही नहीं आता, बल्कि यह भविष्य में होने वाली लिवर की समस्याओं का पूर्वानुमान भी लगा सकता है।
1. ब्लड ग्रुप 'A' वालों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत
रिसर्च के अनुसार, जिन लोगों का ब्लड ग्रुप 'A' है, उनमें ऑटोइम्यून लिवर डिजीज (Autoimmune Liver Disease) का खतरा सबसे अधिक पाया गया है।
क्या होता है इसमें? इस स्थिति में शरीर का रक्षा तंत्र (Immune System) गलती से लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं पर ही हमला करने लगता है।
परिणाम: अगर समय पर पहचान न हो, तो यह सूजन, लिवर सिरोसिस और अंततः लिवर फेल्योर का कारण बन सकता है।
2. ब्लड ग्रुप 'B': क्या यह एक सुरक्षा कवच है?
अध्ययन में एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। ब्लड ग्रुप 'B' वाले व्यक्तियों में लिवर से जुड़ी गंभीर और दुर्लभ बीमारियों का जोखिम तुलनात्मक रूप से कम पाया गया है। विशेषकर 'प्राइमरी बाइलियरी कोलांगाइटिस' (PBC) जैसी बीमारियों के मामले इस ग्रुप में कम देखे गए हैं।
3. 'नॉन-O' ग्रुप और ब्लड क्लॉटिंग का पेंच
वैज्ञानिकों का मानना है कि जिनका ब्लड ग्रुप O नहीं है (A, B, या AB), उनके शरीर में कुछ खास क्लॉटिंग प्रोटीन्स (जैसे वॉन विलेब्रांड फैक्टर) अधिक सक्रिय होते हैं। यह लिवर के भीतर रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में लिवर की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।
प्रमुख बीमारियां जिनका रिस्क ब्लड ग्रुप से जुड़ा है:
ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस (AIH): लिवर सेल्स का डैमेज होना (ग्रुप A में अधिक)।
प्राइमरी बाइलियरी कोलांगाइटिस (PBC): पित्त नलिकाओं (Bile Ducts) का खराब होना।
लिवर सिरोसिस: लिवर में स्थाई घाव या डैमेज।
विशेषज्ञों की सलाह: क्या करें?
रिसर्च का मतलब यह कतई नहीं है कि ब्लड ग्रुप A वाले हर व्यक्ति को बीमारी होगी ही, लेकिन यह 'जेनेटिक रिस्क' की ओर इशारा करता है।
रूटीन चेकअप: यदि आपका ब्लड ग्रुप 'A' है या परिवार में लिवर की हिस्ट्री है, तो समय-समय पर LFT (Liver Function Test) करवाएं।
जीवनशैली: फैटी लिवर से बचने के लिए शराब से दूरी और संतुलित खान-पान अपनाएं।