Edited By Radhika,Updated: 14 Mar, 2026 02:44 PM

Middle East में जारी सैन्य संघर्ष और Strait of Hormuz में पैदा हुए तनाव के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस की वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गैस की कमी की अफवाहों के चलते उपभोक्ताओं में बढ़ी घबराहट को देखते हुए सरकार ने...
नेशनल डेस्क: Middle East में जारी सैन्य संघर्ष और Strait of Hormuz में पैदा हुए तनाव के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस की वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। गैस की कमी की अफवाहों के चलते उपभोक्ताओं में बढ़ी घबराहट को देखते हुए सरकार ने सिलेंडर बुकिंग के लिए एक न्यूनतम समय सीमा निर्धारित कर दी है।
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शहर और गाँव के लिए अलग-अलग समय सीमा
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब शहरों में रहने वाले उपभोक्ता अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर सकेंगे। वहीं, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए के यह नियम 45 दिन का तय किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की औसत खपत के डेटा का विश्लेषण करने के बाद लिया गया है।
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जमाखोरी और पैनिक बुकिंग पर लगाम
इस नियम को लागू करने का प्राथमिक उद्देश्य सिलेंडरों की अनावश्यक जमाखोरी को रोकना है। युद्ध की खबरों के बीच कई लोगों ने जरूरत न होने पर भी अतिरिक्त सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया था, जिससे वितरण केंद्रों पर दबाव बढ़ गया था। सरकार ने साफ किया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और औसतन 2.5 दिनों के भीतर डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। यह नियम केवल मांग को संतुलित करने के लिए एक अस्थायी सुरक्षा कवच है।
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खपत का पैटर्न और लॉजिस्टिक्स
विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में आबादी का घनत्व अधिक होने और गैस पर निर्भरता ज्यादा होने के कारण वहां 25 दिन की सीमा रखी गई है। इसके विपरीत, ग्रामीण इलाकों में ईंधन के अन्य स्रोतों की उपलब्धता और कम औसत खपत को देखते हुए 45 दिन का अंतराल तय किया गया है। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि सिलेंडर केवल उन्हीं परिवारों तक पहुँचे जिन्हें वास्तव में रिफिल की तत्काल आवश्यकता है।