Edited By Anu Malhotra,Updated: 27 Oct, 2025 07:15 PM

मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है। राज्यभर के एलपीजी डीलरों ने कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी है। डिस्ट्रीब्यूटरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर 6 नवंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे...
भोपाल: मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है। राज्यभर के एलपीजी डीलरों ने कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी है। डिस्ट्रीब्यूटरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर 6 नवंबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। अगर ऐसा हुआ, तो घरों तक गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप हो सकती है।
काली पट्टी बांधकर शुरू हुआ विरोध
आंदोलन के पहले चरण में सोमवार से सभी डीलर और उनके कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते परिचालन खर्चों—जैसे डीजल की कीमतें, स्टाफ सैलरी और बिजली बिल—के बावजूद वर्षों से कमीशन नहीं बढ़ाया गया। इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
राज्यभर में हो सकती है गैस की किल्लत
ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन के कोऑर्डिनेटर श्यामानंद शुक्ला ने बताया कि सिर्फ ग्वालियर में ही तीनों तेल कंपनियों के 5.73 लाख से अधिक ग्राहक हैं। अगर नवंबर के पहले हफ्ते में डिलीवरी बंद हुई तो लाखों परिवारों को खाना बनाने में दिक्कत होगी। यही स्थिति राज्य के अन्य जिलों में भी देखने को मिल सकती है।
चार चरणों में तय हुआ आंदोलन
एलपीजी वितरक संघ ने आंदोलन को चार चरणों में आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है—
पहला चरण: काली पट्टी बांधकर कार्य करना (शुरू हो चुका है)।
दूसरा चरण (29 अक्टूबर): शाम 7 बजे से सभी डीलर जिला मुख्यालयों पर मशाल या मोमबत्ती जुलूस निकालेंगे।
तीसरा चरण (6 नवंबर): नो मनी, नो इंडेंट—डीलर उस दिन न पैसा जमा करेंगे, न ऑर्डर देंगे।
चौथा चरण: यदि तब भी कमीशन और डिलीवरी चार्ज नहीं बढ़े, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।
ग्राहकों के लिए क्या मतलब है यह हड़ताल?
अगर वितरक संगठन अपनी चेतावनी पर अड़े रहते हैं, तो राज्यभर में एलपीजी सिलेंडरों की कमी हो सकती है। इसका असर सीधे रसोई तक पहुंचने वाली सप्लाई पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ही दिनों में डोमेस्टिक सिलेंडर की डिलीवरी में देरी और ब्लैक मार्केटिंग की संभावना बढ़ सकती है।
डीलरों की दलील
एलपीजी डीलर एसोसिएशन का कहना है कि कंपनियों द्वारा मिलने वाला सर्विस चार्ज और होम डिलीवरी शुल्क वर्तमान खर्चों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि “हर दिन घाटे में गैस पहुंचाना अब संभव नहीं है, जब तक सरकार या ऑयल कंपनियां कमीशन दरें नहीं बढ़ातीं।”