Edited By Rohini Oberoi,Updated: 14 Jan, 2026 04:15 PM

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों की एक टीम ने एक ऐसी युवती का सफल ऑपरेशन किया है जो जन्म से ही बेहद दुर्लभ शारीरिक...
Operation Successful: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों की एक टीम ने एक ऐसी युवती का सफल ऑपरेशन किया है जो जन्म से ही बेहद दुर्लभ शारीरिक विसंगतियों से जूझ रही थी। युवती के शरीर में दो बच्चेदानी (Uterus) और दो योनि (Vagina) थीं जिसके कारण उसका सामान्य जीवन नरक बन चुका था। डॉक्टरों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में इस तरह की जटिलताओं वाला यह अपनी तरह का पहला सफल ऑपरेशन है।
बचपन से डायपर पर निर्भर थी युवती
बलिया की रहने वाली यह युवती जन्म से ही तीन गंभीर और दुर्लभ बीमारियों का शिकार थी। उसके शरीर में कुदरती तौर पर दो बच्चेदानी और दो योनियां विकसित हो गई थीं। पेशाब की नलिकाएं गलत जगह जुड़ी होने के कारण वह चाहकर भी यूरिन नहीं रोक पाती थी। बचपन से ही उसे हर वक्त डायपर पहनना पड़ता था। शौच का रास्ता (गुदा मार्ग) पूरी तरह विकसित नहीं था और वह योनि के बेहद करीब था जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता था और पेट साफ नहीं होता था।
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तीन चरणों में हुआ जटिल सर्जिकल स्ट्राइक
युवती के परिजनों ने कई शहरों में इलाज कराया लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। अंततः लोहिया संस्थान के प्रो. ईश्वर राम धायल और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। डॉक्टरों ने तीन चरणों में सर्जरी की योजना बनाई:
पहला चरण: सबसे पहले सर्जरी के जरिए गुदा मार्ग (Anus) को सही स्थान पर विकसित किया गया ताकि पेट साफ होने की समस्या खत्म हो सके।
दूसरा और तीसरा चरण: इन चरणों में पेशाब की नलिकाओं को सही जगह जोड़ा गया और पेशाब पर नियंत्रण पाने के लिए मांसपेशियों की मरम्मत की गई।
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सामाजिक और शारीरिक कष्ट से मिली मुक्ति
प्रो. ईश्वर राम धायल के मुताबिक यह ऑपरेशन न केवल तकनीकी रूप से कठिन था बल्कि युवती के भविष्य के लिए भी बहुत जरूरी था। इस दुर्लभ शारीरिक बनावट के कारण युवती न केवल शारीरिक दर्द झेल रही थी बल्कि सामाजिक रूप से भी काफी परेशान थी।
सर्जरी के बाद का परिणाम
अब युवती को पेशाब पर पूरी तरह नियंत्रण है। शौच की समस्या खत्म हो चुकी है। वह अब एक सामान्य महिला की तरह जीवन जीने के लिए तैयार है।