LPG संकट के बीच दिल्ली सरकार ने लाखों प्रवासी मजदूरों को दी बड़ी राहत: आधार कार्ड दिखाकर ले सकते है 5 किलो वाला गैस सिलेंडर

Edited By Updated: 04 Apr, 2026 09:03 AM

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LPG संकट के बीच दिल्ली सरकार ने प्रवासी मजदूरों को एक बड़ी राहत दी। अक्सर घर से दूर किराए के कमरों में रहने वाले इन कामगारों के लिए  बिना स्थानीय Address Proof के Gas Connection मिलना लगभग नामुमकिन था। लेकिन अब दिल्ली सरकार के खाद्य और आपूर्ति विभाग...

नेशनल डेस्क: LPG संकट के बीच दिल्ली सरकार ने प्रवासी मजदूरों को एक बड़ी राहत दी। अक्सर घर से दूर किराए के कमरों में रहने वाले इन कामगारों के लिए  बिना स्थानीय Address Proof के Gas Connection मिलना लगभग नामुमकिन था। लेकिन अब दिल्ली सरकार के खाद्य और आपूर्ति विभाग ने इस अड़चन को खत्म कर दिया है। 

सरकार ने बड़ा ऐलान किया है कि अब कोई भी मजदूर सिर्फ अपना Aadhar card या कोई भी सरकारी पहचान पत्र दिखाकर 5 किलो वाला छोटा एलपीजी सिलेंडर तुरंत हासिल कर सकता है। इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो पहचान और पते के दस्तावेजों की कमी के कारण अब तक भारी परेशानियों का सामना कर रहे थे।

इस घोषणा के साथ ही विभाग के एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा ने राजधानी के लोगों को ईंधन की सप्लाई को लेकर भी आश्वस्त किया है। उन्होंने साफ कहा कि दिल्ली में पेट्रोल, डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है और न ही आने वाले समय में ऐसा कोई संकट होगा। अगर कहीं भी कालाबाजारी या किल्लत की शिकायत आती है, तो उसके लिए सरकार ने एक विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया है जो चौबीसों घंटे निगरानी रखेगा।

वहीं दूसरी तरफ, सरकार अब दिल्ली को पूरी तरह पीएनजी (पाइप वाली प्राकृतिक गैस) से लैस करने की तैयारी में है। विभाग का कहना है कि एलपीजी के मुकाबले पीएनजी अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक है, इसलिए इसके विस्तार की रफ्तार को तीन गुना बढ़ा दिया गया है। अब हर रोज करीब 3,000 नए कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि जिन इलाकों में पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां लोग जल्द से जल्द पीएनजी अपना लें, क्योंकि भविष्य में पीएनजी वाले क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता सीमित की जा सकती है।

इसके अलावा, सरकार दिल्ली में मौजूद करीब 56 लाख घरेलू गैस कनेक्शनों की कैटेगरी की भी जांच कर रही है। विभाग चाहता है कि हर उपभोक्ता का कनेक्शन सही कैटेगरी में दर्ज हो ताकि घरेलू गैस का इस्तेमाल कॉमर्शियल कामों में न हो सके। इससे न केवल गैस की बर्बादी रुकेगी, बल्कि सरकार की सब्सिडी का फायदा भी सीधे तौर पर उन्हीं जरूरतमंदों को मिलेगा जो इसके असली हकदार हैं।  

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