Mukesh Kumar Masoom : बचपन में की मजदूरी, आज बॉलीवुड के दिग्गज गा रहे हैं इनके गीत

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 05:00 PM

mukesh kumar masoom

Mumbai : मुकेश कुमार मासूम आधुनिक हिंदी साहित्य, सिनेमा और सामाजिक लेखन के क्षेत्र में एक बहुआयामी और संवेदनशील रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में सरल भाषा के साथ गहरी भावनाएं झलकती हैं, जो पाठकों और श्रोताओं दोनों को जोड़ने की क्षमता...

Mumbai : मुकेश कुमार मासूम आधुनिक हिंदी साहित्य, सिनेमा और सामाजिक लेखन के क्षेत्र में एक बहुआयामी और संवेदनशील रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में सरल भाषा के साथ गहरी भावनाएं झलकती हैं, जो पाठकों और श्रोताओं दोनों को जोड़ने की क्षमता रखती हैं। उनके कार्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं हैं, बल्कि अनुभव, संवेदनाएं और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज़ हैं।

मुकेश का जन्म 13 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के छोटे गांव दयानतपुर में हुआ। उनकी पारिवारिक परिस्थितियां बहुत ही साधारण थीं और बचपन में ही उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कम उम्र में ही उन्हें मजदूरी और सिलाई जैसे काम करने पड़े, जिससे उनका व्यक्तित्व जल्दी परिपक्व हो गया। पिता द्वारा छोड़ा गया कर्ज़ उन्होंने अपने परिश्रम से कम उम्र में चुका दिया।

22 अप्रैल 1992 को बेहतर भविष्य की तलाश में मुकेश मुंबई आए। यहाँ उन्हें जीवन की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन धैर्य, मेहनत और प्रतिभा की मदद से उन्होंने अपने लिए एक अलग पहचान बनाई। संघर्षों ने उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाया और धीरे-धीरे उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म उद्योग में अपनी जगह बनाई।

मुकेश ने M.A. और L.L.B. की शिक्षा प्राप्त की और वर्तमान में वे Ph.D. कर रहे हैं। उनकी शिक्षा ने उनके लेखन को तार्किक दृढ़ता दी, जबकि जीवन के अनुभवों ने इसे यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं से समृद्ध किया।

वे स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (SWA) और इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के सदस्य हैं। इसके अलावा, वे बॉलीवुड में एक स्थापित गीतकार के रूप में भी जाने जाते हैं। उनके कई गीत लोकप्रिय और चर्चित रहे हैं, जैसे—

“दिल तोड़ने वाला, दिल का खुद निकला” (उदित नारायण)
“दारू सिगरेट छोड़ दे” (ममता शर्मा)
“जीवन एक अमृत है” (उदित नारायण)
“खाटू श्याम जाना है” (अनूप जलोटा)
“जय भीम बोलो रे” (मोहम्मद अज़ीज़)
“ब्रेकअप पार्टी” (हरमन नाज़िम)

मुकेश ने अनेक प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं, जिनमें पद्मश्री अनूप जलोटा, पद्मश्री कुमार सानू और पद्मश्री एवं पद्म भूषण उदित नारायण शामिल हैं। उनके गीतों में भावनात्मक गहराई और लोकसंवेदनाएं मिलती हैं, जो श्रोताओं के मन को गहराई से छूती हैं। साहित्य में भी उनकी उल्लेखनीय कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें उनकी पुस्तक “गुलिस्तां” विशेष रूप से लोकप्रिय रही। उनके लेखन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठक को सोचने और आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करना भी है।

पत्रकारिता में उन्होंने मुंबई के बहुभाषीय समाचार पत्रों में संपादक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्तमान में वे Cinevistaas Limited और अन्य प्रतिष्ठित फिल्म एवं टेलीविजन कंपनियों के लिए लेखन कर रहे हैं। इसके अलावा, उनका राष्ट्रमाता पॉडकास्ट भी शुरू होने वाला है, जिसमें वे देश की प्रसिद्ध हस्तियों के इंटरव्यू करेंगे। साहित्य, सिनेमा और समाज- इन तीनों क्षेत्रों में सक्रिय मुकेश कुमार मासूम की लेखनी आज भारतीय गीत-संस्कृति और वैचारिक साहित्य की एक मूल्यवान धरोहर के रूप में देखी जाती है। उनके शब्द केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि संवेदना जगाते हैं, विचार उत्पन्न करते हैं और समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करते हैं। आज देश में लाखों लोग उनकी सफल संघर्षमय कहानी से प्रेरणा लेते हैं। पूर्व राष्टपति रामनाथ कोविंद भी मुकेश मासूम को उनकी उपलब्धियों पर सम्मानित कर चुके हैं।

इस प्रकार मुकेश कुमार मासूम का जीवन और कृतित्व संघर्ष, संवेदना और सृजन की ऐसी प्रेरक यात्रा है, जो यह संदेश देता है कि सच्ची प्रतिभा और अटूट परिश्रम के बल पर साधारण पृष्ठभूमि से उठकर भी व्यक्ति असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

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