न सुई न दर्द...अब सिर्फ फेस स्कैन करके होगा ब्लड टेस्ट, एक मिनट से भी कम में मिलेगी रिपोर्ट

Edited By Updated: 28 May, 2025 11:57 AM

no needle no pain  now blood test will be done just by face scan

अब स्वास्थ्य जांच के लिए खून की सुई चुभवाने की जरूरत नहीं। एक नया मोबाइल ऐप, Quick Vitals, मात्र 20 सेकंड में ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, ऑक्सीजन लेवल और स्ट्रेस जैसी कई अहम हेल्थ पैरामीटर्स बता सकता है- वो भी बिना खून लिए। यह तकनीक,...

नेशनल डेस्क: अब स्वास्थ्य जांच के लिए खून की सुई चुभवाने की जरूरत नहीं। एक नया मोबाइल ऐप, Quick Vitals, मात्र 20 सेकंड में ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, ऑक्सीजन लेवल और स्ट्रेस जैसी कई अहम हेल्थ पैरामीटर्स बता सकता है- वो भी बिना खून लिए। यह तकनीक, Photoplethysmography (PPG) पर आधारित है, जिसमें फोन के कैमरे से त्वचा से परावर्तित रोशनी का विश्लेषण करके स्वास्थ्य संकेतकों का आकलन किया जाता है।

निलोफ़र अस्पताल में सफल परीक्षण
हैदराबाद के निलोफ़र सरकारी अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में इस ऐप का इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की पहचान के लिए किया गया। इससे महिलाओं को समय पर इलाज मिल पाया। अब इसे महाराष्ट्र और फिर देश के दूर-दराज इलाकों में लागू करने की योजना है।

एक मिनट से भी कम में रिपोर्ट
Quick Vitals ऐप को बिसम फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित किया गया है और इसके संस्थापक हरीश बिसम ने बताया कि ऐप की रीडिंग्स, WHO और American Heart Association द्वारा तय मानकों के अंदर आती हैं। यानी यह पारंपरिक ब्लड टेस्ट के लगभग बराबर सटीकता देता है।

किन पैरामीटर्स की जांच करता है ऐप?
ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, कोलेस्ट्रॉल, हीमोग्लोबिन A1c, ऑक्सीजन सेचुरेशन (SpO2), ब्रीदिंग रेट, स्ट्रेस लेवल, PRQ (Pulse Respiratory Quotient), हार्ट रेट वायाबिलिटी (HRV), Parasympathetic और Sympathetic एक्टिविटी

बच्चों और माताओं की सेहत में मददगार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टूल भारत में हेल्थकेयर की दिशा बदल सकता है, खासकर गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों, और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए। सरकार के RBSK और RKSK जैसे कार्यक्रमों में यह बड़ा रोल निभा सकता है। Quick Vitals ऐप यूज़र्स का डेटा एन्क्रिप्टेड और सिक्योर सर्वर पर स्टोर करता है। केवल अधिकृत हेल्थ प्रोफेशनल्स ही इस डेटा तक पहुंच सकते हैं।

जल्द ही ऐप पर आधारित एक क्लिनिकल ट्रायल 1,000 बच्चों पर किया जाएगा ताकि इसके परिणामों की तुलना पारंपरिक ब्लड टेस्ट से की जा सके। यदि यह सफल होता है, तो यह बच्चों की समय रहते जांच के लिए क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

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