‘तेल-LNG चाहिए तो बताइए…’ रूस का बड़ा ऑफर, क्या भारत फिर बढ़ाएगा आयात?

Edited By Updated: 03 Apr, 2026 09:00 PM

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया के कई देश तेल और गैस की भारी किल्लत झेल रहे हैं। ऐसे हालात में भारत को रूसी सप्लाई ने काफी हद तक संभाले रखा है। अब रूस ने एक बार फिर भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया के कई देश तेल और गैस की भारी किल्लत झेल रहे हैं। ऐसे हालात में भारत को रूसी सप्लाई ने काफी हद तक संभाले रखा है। अब रूस ने एक बार फिर भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

रूस ने साफ कहा है कि अगर जरूरत हो तो वह तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, रूस के पहले डिप्टी प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने भारत दौरे के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से गुरुवार (2 अप्रैल 2026) को मुलाकात की, जिसमें ऊर्जा सहयोग पर खास चर्चा हुई।

मंटुरोव ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी बातचीत की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

तेल-गैस सहयोग पर खास जोर…
नई दिल्ली में हुई बैठकों के बाद जारी रूसी बयान में कहा गया कि तेल और गैस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। बयान के मुताबिक, “डेनिस मंटुरोव ने पुष्टि की कि रूसी कंपनियों के पास भारतीय बाजार में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई लगातार बढ़ाने की क्षमता है।”

बढ़ती कीमतों के बीच आया प्रस्ताव…
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। ईरान जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है और उसने अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, को भी बंद कर दिया है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकीर्ण मार्ग दुनिया के करीब 20% तेल और LNG ट्रांसपोर्ट का मुख्य रास्ता है। भारत भी खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है।

बदला आयात पैटर्न… फिर बढ़ा रूस से खरीद
रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप की सख्ती के चलते भारत ने पहले रूस से आयात कम कर दिया था और मिडिल ईस्ट से खरीद बढ़ाई थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई बाधित हुई। इसके बाद बढ़ती कीमतों को देखते हुए ट्रंप ने भारत को रूस से तेल आयात की अस्थायी छूट दी, जिसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदना शुरू कर दिया।

भारत-रूस बैठक में और क्या हुआ…
गुरुवार को भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता डेनिस मंटुरोवऔर एस. जयशंकर ने की। रूसी बयान के अनुसार, व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। मौजूदा हालात में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के नए रास्तों पर भी चर्चा हुई। मंतुरोव ने बताया कि 2025 के अंत तक रूस ने भारत को उर्वरकों की आपूर्ति में 40% तक बढ़ोतरी की है और वह आगे भी भारत की जरूरतें पूरी करने को तैयार है।

2030 तक बड़ा लक्ष्य…
दोनों देशों ने दिसंबर में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के फैसलों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की। इस दौरान व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे। नरेंद्र मोदी और पुतिन की बैठक के बाद दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी मजबूत करने के लिए 5 साल का रोडमैप तैयार किया था और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

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