क्रिएटिव की दुनिया में पसरा मातम: विज्ञापन के जादूगर ने दुनिया को कहा अलविदा

Edited By Updated: 24 Oct, 2025 01:03 PM

piyush pandey the king of indian advertising passes away

भारतीय विज्ञापन जगत की रचनात्मकता और सादगी का चेहरा कहे जाने वाले पद्मश्री पीयूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में शुक्रवार को निधन हो गया। पांडे सिर्फ एक विज्ञापन विशेषज्ञ नहीं थे बल्कि एक ऐसे अद्वितीय कहानीकार थे जिन्होंने भारतीय विज्ञापनों को उसकी अपनी...

नेशनल डेस्क। भारतीय विज्ञापन जगत की रचनात्मकता और सादगी का चेहरा कहे जाने वाले पद्मश्री पीयूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में शुक्रवार को निधन हो गया। पांडे सिर्फ एक विज्ञापन विशेषज्ञ नहीं थे बल्कि एक ऐसे अद्वितीय कहानीकार थे जिन्होंने भारतीय विज्ञापनों को उसकी अपनी भाषा, भावना और आत्मा दी। उनके निधन की खबर से पूरे देश और विज्ञापन इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। पीयूष पांडे की बहन ईला ने सोशल मीडिया पर इस दुखद खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि, "बहुत दुख और टूटे दिल के साथ आपको यह बताते हुए मैं बेहद पीड़ा महसूस कर रही हूँ कि आज सुबह हमारे प्यारे और महान भाई, पीयूष पांडे का निधन हो गया।"

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टी-टेस्टर से 'क्रिएटिव गुरु' तक का सफर

जयपुर में जन्मे पीयूष पांडे का जीवन और करियर दोनों ही बेहद दिलचस्प रहे।

उनके काम ने विज्ञापन को सिर्फ उत्पाद बेचने का जरिया नहीं बल्कि संस्कृति और यादों का हिस्सा बना दिया।

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सम्मान और पुरस्कार

पीयूष पांडे खुद भारतीय रचनात्मकता का विश्व मंच पर प्रतीक बन गए थे। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था:

  • पद्म श्री

  • कई Cannes Lions

  • 2024 में LIA Legend Award

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का भावुक पोस्ट

पीयूष पांडे के निधन पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने X (पूर्व में ट्विटर) पर भावुक पोस्ट किया।

  • गोयल का संदेश: उन्होंने लिखा, "पद्मश्री पीयूष पांडे के निधन की खबर सुनकर मैं अपने दुख को शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा हूँ। उनकी क्रिएटिव प्रतिभा ने कहानी कहने के तरीके को ही बदल दिया और हमें हमेशा याद रहने वाली अनमोल कहानियाँ दीं। मेरे लिए वह एक ऐसे मित्र थे जिनकी असलियत, गर्मजोशी और हाजिरजवाबी में उनकी प्रतिभा झलकती थी।"

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सहकर्मियों ने कहा 'दिल से बोलो'

सहकर्मी पीयूष पांडे को एक ऐसे गुरु के रूप में याद करते हैं जिन्होंने सादगी, इंसानियत और क्रिएटिविटी का सही संतुलन बनाए रखा। उनका मार्गदर्शक मंत्र था— "सिर्फ मार्केट को नहीं, दिल से बोलो।" यह सोच आज भी भारतीय विज्ञापन की दिशा को प्रभावित करती है। उनके जाने से भारतीय विज्ञापन जगत में एक बड़ा खालीपन आया है लेकिन उनका काम आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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