Edited By Tanuja,Updated: 02 Mar, 2026 12:39 PM

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और शिक्षा पर चर्चा होगी। यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों के सामान्यीकरण के...
International Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) के बीच सोमवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। दोनों नेताओ में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई जिसमें भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की गई।यह प्रधानमंत्री कार्नी की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो 27 फरवरी से 2 मार्च तक चल रही है।
Watch | Prime Minister Narendra Modi hold delegation-level talks with Canadian Prime Minister Mark Carney at Hyderabad House in Delhi.@PMOIndia | @narendramodi | @MarkJCarney | @MEAIndia | @HCI_Ottawa | #PMModi | #NarendraModi | #MarkCarney | #India | #Canada | #Delhi |… pic.twitter.com/ySOUtzLiuG
— United News of India (@uniindianews) March 2, 2026
उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत 27 फरवरी को मुंबई से की और रविवार शाम दिल्ली पहुंचे। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से की और रविवार शाम दिल्ली पहुंचे। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar )ने भी प्रधानमंत्री कार्नी से मुलाकात की और भविष्य की साझेदारी को “फॉरवर्ड-लुकिंग” बताते हुए सकारात्मक संकेत दिए। जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद (Anita Anand) से भी चर्चा की, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
इन मुद्दों पर फोकस
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच इन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा और विस्तार पर फोकस रहेगा
- व्यापार और निवेश
- ऊर्जा सहयोग
- क्रिटिकल मिनरल्स
- कृषि
- शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार
- लोगों के बीच संपर्क
- इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर भी दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए।
- भारत-कनाडा CEO फोरम में आर्थिक एजेंडा
औपचारिक वार्ता के साथ-साथ दोनों प्रधानमंत्री भारत-कनाडा CEO फोरम में भी शामिल हुए। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र के निवेश और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब दोनों देश अपने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कूटनीतिक हलकों में इसे विश्वास बहाली और रणनीतिक साझेदारी को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।