मां की प्रॉपर्टी पर किसका होता है हक और कैसे होता है बंटवारा? जानिए क्या कहता है हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम

Edited By Updated: 12 Jan, 2026 05:12 PM

right to the mother s property and how is it divided

मां की संपत्ति के बंटवारे को लेकर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम स्पष्ट नियम तय करता है। संपत्ति का अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि वह मां ने स्वयं अर्जित की है या विरासत में मिली है। वसीयत होने पर संपत्ति उसी के अनुसार मिलती है, जबकि वसीयत न होने पर...

नेशनल डेस्कः मां की संपत्ति पर हक को लेकर भारतीय कानून स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है, लेकिन इस विषय पर अक्सर भ्रम बना रहता है। क्या होता है जब संपत्ति मां के नाम पर हो? क्या बेटी का मां की संपत्ति पर उतना ही अधिकार है जितना बेटे का? हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत, मां की संपत्ति के बंटवारे के नियम और उत्तराधिकार की प्राथमिकता को लेकर विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण बातें सामने रखी हैं। जानिए, मां की खुद अर्जित संपत्ति और विरासत में मिली संपत्ति के मामलों में बंटवारा कैसे होता है।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम क्या कहता है?

‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956’ के तहत मां की संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, जिनका पालन अनिवार्य है।

जब मां की संपत्ति स्वयं अर्जित (Self-acquired Property) हो

- अगर मां ने अपनी कमाई से कोई संपत्ति खरीदी है या उन्हें वह संपत्ति उपहार (Gift) में मिली है, तो वह उस संपत्ति की पूर्ण स्वामिनी होती हैं।

- यदि मां ने वसीयत (Will) बनाई है, तो संपत्ति उसी व्यक्ति को मिलेगी, जिसका नाम वसीयत में दर्ज है।

- मां अपनी इच्छा से किसी एक बेटे, बेटी या यहां तक कि किसी बाहरी व्यक्ति को भी संपत्ति दे सकती हैं।

- यदि मां की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाती है, तो संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 के अनुसार किया जाएगा।

वसीयत न होने पर संपत्ति के हकदार 

यदि मां वसीयत छोड़कर नहीं जाती हैं, तो संपत्ति पर अधिकार इस क्रम में तय होगा:

पहला हक:
बेटे, बेटियां (विवाहित या अविवाहित) और पति — इन सभी को संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलेगा। यदि किसी संतान की पहले मृत्यु हो चुकी है, तो उसका हिस्सा उसके बच्चों को मिलेगा।

दूसरा हक:
यदि पति और संतान नहीं हैं, तो संपत्ति पति के उत्तराधिकारियों को मिलेगी।

तीसरा हक:
यदि कोई भी उत्तराधिकारी नहीं हैं, तो संपत्ति मां के माता-पिता को दी जाएगी।

चौथा हक:
मां के पिता के उत्तराधिकारियों को संपत्ति मिलेगी।

पांचवां हक:
मां की माता के उत्तराधिकारियों को संपत्ति मिलेगी।

बेटियों के अधिकार पर कानून स्पष्ट

समाज में अक्सर यह धारणा रहती है कि शादी के बाद बेटी का मां की संपत्ति पर अधिकार खत्म हो जाता है, लेकिन कानून ऐसा नहीं कहता। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार, बेटियों का मां की संपत्ति पर उतना ही अधिकार है जितना बेटों का, चाहे बेटी विवाहित हो, अविवाहित हो या विधवा। यहां तक कि अगर मां को अपने माता-पिता (ननिहाल) से कोई संपत्ति विरासत में मिली है, तो उस संपत्ति में भी बेटी का बराबर का हिस्सा होता है।

विरासत में मिली संपत्ति का नियम

यदि मां को संपत्ति उनके पति या ससुराल पक्ष से विरासत में मिली थी और मां की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाती है, तो वह संपत्ति पति के उत्तराधिकारियों को वापस चली जाती है। वहीं, यदि संपत्ति मां को उनके माता-पिता (मायके) से मिली थी, तो ऐसी संपत्ति उनके पिता के उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित की जाएगी।

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