Silver Price Crash: अब औंधे मुंह गिरेंगे चांदी की कीमत, एक्सपर्ट्स ने बताया बड़ी गिरावट की असली वजह

Edited By Updated: 04 Jan, 2026 12:09 PM

silver prices are set to plummet and experts have revealed the real reason

बीते कुछ महीनों से चांदी के दाम जिस रफ्तार से बढ़ रहे थे, अब उस तेजी के थमने के संकेत मिलने लगे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि चांदी की कीमतों में आने वाले समय में तेज गिरावट देखी जा सकती है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 82.670...

नेशनल डेस्क: बीते कुछ महीनों से चांदी के दाम जिस रफ्तार से बढ़ रहे थे, अब उस तेजी के थमने के संकेत मिलने लगे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि चांदी की कीमतों में आने वाले समय में तेज गिरावट देखी जा सकती है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 82.670 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद ही दाम फिसलकर करीब 71.300 डॉलर प्रति औंस तक आ गए। इस अचानक आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। अगर समय रहते मुनाफा नहीं निकाला गया, तो आगे चलकर बड़ा नुकसान भी हो सकता है। कुछ जानकार तो यहां तक मान रहे हैं कि चांदी के भावों में लंबी अवधि में 50 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट संभव है।

क्यों आई थी चांदी में रिकॉर्ड तेजी
साल 2025 में चांदी निवेशकों के लिए सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली धातुओं में शामिल रही। मांग और आपूर्ति के असंतुलन की वजह से इसके दामों में करीब 180 प्रतिशत तक उछाल देखा गया। इस तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण रहे। टेक और बैटरी सेक्टर में बड़े बदलाव, खासतौर पर सॉलिड-स्टेट बैटरी की ओर बढ़ता रुझान, चांदी की औद्योगिक मांग को बढ़ाने वाला साबित हुआ। इसके अलावा कुछ प्रमुख उत्पादक देशों में सप्लाई बाधित होने, अंतरराष्ट्रीय तनाव और चीन की ओर से चांदी के निर्यात को लेकर सख्ती जैसे कदमों ने कीमतों को और ऊपर पहुंचा दिया।


महंगे दामों से उद्योगों की मुश्किल बढ़ी
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब किसी कच्चे माल की कीमत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो उद्योग उसके विकल्प तलाशने लगते हैं। चांदी के साथ भी अब यही स्थिति बन रही है।
सोलर पैनल, फोटोवोल्टिक सेल और बैटरी बनाने वाली कई कंपनियां चांदी की जगह कॉपर जैसे सस्ते विकल्पों पर काम शुरू कर चुकी हैं। एशिया और अन्य देशों की कई कंपनियां इस दिशा में तेजी से रिसर्च कर रही हैं। अगर यह बदलाव बड़े पैमाने पर होता है, तो चांदी की औद्योगिक मांग पर सीधा असर पड़ेगा।


इतिहास भी देता है चेतावनी
चांदी के पिछले रुझानों को देखें तो हर बड़ी तेजी के बाद इसमें जोरदार गिरावट आई है।
1980 में हंट ब्रदर्स के दौर में चांदी के दाम करीब 50 डॉलर तक पहुंचे थे, लेकिन इसके बाद यह सीधे 11 डॉलर के आसपास आ गई थी। इसी तरह 2011 में भी चांदी ने ऊंचाई छूने के बाद करीब 70-75 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की थी। अब एक बार फिर एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन बढ़ाए जाने और सट्टा गतिविधियों पर लगाम कसने से हालात वैसे ही बनते दिख रहे हैं।


आगे क्या हो सकता है चांदी का हाल
जानकारों का मानना है कि अल्पकाल में शॉर्ट-कवरिंग के चलते चांदी फरवरी 2026 तक 95 से 100 डॉलर प्रति औंस के आसपास भी जा सकती है, लेकिन यह तेजी ज्यादा टिकाऊ नहीं होगी।
लंबी अवधि की बात करें तो वित्त वर्ष 2027 तक चांदी पर दबाव बना रह सकता है। अगर हालिया रिकॉर्ड स्तर ही इसका टॉप साबित होता है, तो आने वाले समय में कीमतें 35 से 40 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकती हैं।


निवेशकों के लिए सलाह
एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि इस समय चांदी में नई खरीदारी से बचना बेहतर होगा। जिन निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिल चुका है, वे धीरे-धीरे उसे सुरक्षित कर सकते हैं। बाजार की दिशा साफ होने तक सतर्कता ही सबसे सही रणनीति मानी जा रही है।

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!