Silver Price: चांदी के दामों में जबरदस्त बढ़ोतरी, क्या जनवरी में 3.50 लाख रुपये पार करेगी कीमत?

Edited By Updated: 20 Jan, 2026 02:10 PM

silver reaches record high crosses 3 lakh mark now eyes 3 50 lakh

चांदी की कीमतें 20 जनवरी 2026 को भारतीय बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। MCX पर मार्च कॉन्ट्रैक्ट 3.16 लाख रुपये प्रति किलो के पार कारोबार कर रहा है, जबकि रिटेल भाव 3.15 लाख रुपये के आसपास हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड,...

नेशनल डेस्कः चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। 20 जनवरी 2026 को भारतीय बाजार में चांदी अपने अब तक के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। 3 लाख रुपये प्रति किलो का मनोवैज्ञानिक स्तर टूटने के बाद अब बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जनवरी के भीतर ही चांदी 3.50 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा भी पार कर जाएगी।

चांदी का ताजा भाव
MCX पर चांदी के मार्च कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 3,16,355 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। सुबह करीब 11:15 बजे चांदी के भाव में 6,080 रुपये की तेजी देखी गई। वहीं दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जैसे प्रमुख शहरों में रिटेल बाजार में चांदी का भाव 3,15,100 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है।

क्या 3.50 लाख रुपये का स्तर पार होगा?
बाजार विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्मों, जैसे SAMCO Securities, का मानना है कि यह लक्ष्य असंभव नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, चांदी ने एक बड़े तकनीकी ‘ब्रेकआउट जोन’ को पार कर लिया है। अगर मौजूदा तेजी बनी रहती है, तो अगला तकनीकी टारगेट 3.56 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रेड वॉर और गहराता है और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ बयानों पर कायम रहते हैं, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर चांदी जनवरी के अंत तक या फरवरी की शुरुआत में 3.50 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकती है।

क्या कीमतों में करेक्शन संभव है?
हालांकि, चांदी पिछले 15 दिनों में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। ऐसे में मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विश्लेषकों के मुताबिक, 3.17 लाख रुपये के आसपास बिकवाली दबाव आ सकता है, जिससे कीमतें अस्थायी रूप से गिरकर 2.80 लाख रुपये प्रति किलो तक आ सकती हैं।

चांदी की ‘सुपर रैली’ के तीन बड़े कारण

सप्लाई की भारी कमी: चांदी का खनन मांग की तुलना में काफी कम है। दुनिया लगातार पांचवें साल चांदी की आपूर्ति कमी (डिफिसिट) का सामना कर रही है।

इंडस्ट्रियल डिमांड में तेज उछाल: सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और AI चिप्स में चांदी का कोई सस्ता विकल्प नहीं है। इन क्षेत्रों की तेज ग्रोथ से चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।

भू-राजनीतिक तनाव: रूस, ईरान और अब अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों को समर्थन मिल रहा है।

 

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