Edited By Sahil Kumar,Updated: 23 Jan, 2026 07:19 PM

चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। MCX पर रिकॉर्ड हाई बनाने के अगले ही दिन यानी 22 जनवरी को चांदी 14 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में करेक्शन और मुनाफावसूली के चलते आई इस गिरावट ने चांदी के...
नेशनल डेस्कः चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। MCX पर रिकॉर्ड हाई बनाने के अगले ही दिन यानी 22 जनवरी को चांदी 14 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में करेक्शन और मुनाफावसूली के चलते आई इस गिरावट ने चांदी के पुराने क्रैश की याद दिला दी है।
एक दिन में 14 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट
21 जनवरी को MCX पर चांदी ने करीब 3.34 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर बनाया था। हालांकि, अगले ही दिन यानी 22 जनवरी को इसमें भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत करीब 3.19 लाख रुपये प्रति किलो पर हुई। दिन के दौरान कीमतें 3.25 लाख रुपये तक गईं, लेकिन बाद में फिसलकर 3.05 लाख रुपये प्रति किलो तक आ गईं। इस तरह, एक ही दिन में चांदी करीब 4.4 प्रतिशत टूट गई और कीमतों में 14 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी कमजोर रही। कई हफ्तों की तेज तेजी के बाद वहां करेक्शन देखने को मिला। बीते तीन हफ्तों में करीब 30 प्रतिशत की तेजी आई थी, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
1980 का ऐतिहासिक क्रैश और हंट ब्रदर्स
चांदी के इतिहास में साल 1980 बेहद अहम माना जाता है। उस समय अमेरिका के हंट ब्रदर्स ने बड़ी मात्रा में चांदी खरीदकर बाजार पर दबदबा बना लिया था। इसके चलते चांदी की कीमतें तेजी से बढ़ीं और कुछ ही समय में 6 डॉलर से बढ़कर करीब 49 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं। हालांकि, जब अमेरिकी नियामकों ने नियम सख्त किए और नई खरीद पर रोक लगाई, तो बाजार अचानक पलट गया। 27 मार्च 1980 को चांदी की कीमतों में एक ही दिन में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई। हंट ब्रदर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कई निवेशक भी डूब गए। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा दौर में ऐसी स्थिति दोबारा बनना मुश्किल है, क्योंकि:
- अब बाजार का आकार काफी बड़ा है
- रेगुलेशन और कंट्रोल मजबूत हैं
- इंडस्ट्री से डिमांड बनी हुई है
- निवेश के विकल्प और पारदर्शिता ज्यादा है
- ग्लोबल ट्रेड और हेजिंग मैकेनिज्म विकसित हो चुके हैं
2011 में भी दोहराया गया इतिहास
साल 2011 में भी चांदी ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया था। 2008 के बाद लगातार तेजी के चलते अप्रैल 2011 में चांदी करीब 48 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। उस समय कीमतों के 100 डॉलर तक जाने की चर्चाएं होने लगी थीं। लेकिन कुछ ही दिनों में हालात बदल गए। वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलने लगे और निवेशकों ने जोखिम वाले बाजारों से दूरी बनानी शुरू कर दी। नतीजतन, मई 2011 में चांदी की कीमतें तेजी से गिरीं और कुछ ही हफ्तों में इसमें 30 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
महामारी और उसके बाद की गिरावट
- 2013 में चांदी की कीमतें करीब 35 प्रतिशत गिरीं
- 2014 में इसमें लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट आई
- मार्च 2020 में कोरोना महामारी के शुरुआती झटके के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें गिरकर करीब 12 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।