8th Pay Commission लागू होते ही IAS अफसरों के बैंक बैलेंस में आएगा बड़ा उछाल...एक झटके में बन जाएंगे करोड़पति

Edited By Updated: 19 Jan, 2026 12:11 PM

the implementation of the 8th pay commission will lead to a significant increase

आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सरकारी स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक न तो इसकी औपचारिक घोषणा की गई है और न ही फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला हुआ हैं।

नेशनल डेस्क: आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सरकारी स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक न तो इसकी औपचारिक घोषणा की गई है और न ही फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला हुआ हैं। लेकिन विशेषज्ञों और पूर्व वेतन आयोगों के रुझानों के आधार पर केंद्रीय सेवाओं, विशेषकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के वेतन में संभावित बढ़ोतरी को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं।

आमतौर पर हर 10 वर्ष में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है। सातवां वेतन आयोग वर्ष 2016 में लागू हुआ था, ऐसे में आठवें वेतन आयोग के 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है।

शुरुआती स्तर के IAS अधिकारी का वेतन
वर्तमान में सातवें वेतन आयोग के तहत एंट्री लेवल (SDM या असिस्टेंट सेक्रेटरी) पर एक IAS अधिकारी का बेसिक वेतन 56,100 रुपये है। यदि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.92 से 2.86 के बीच तय किया जाता है, तो बेसिक वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

अनुमानों के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर 1.92 होने पर बेसिक वेतन लगभग 1.07 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि 2.86 होने की स्थिति में यह 1.60 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। भत्तों को जोड़ने के बाद नए IAS अधिकारी की मासिक ग्रॉस सैलरी 1.70 लाख से 2 लाख रुपये के बीच हो सकती है।


डीएम, कलेक्टर और जॉइंट सेक्रेटरी का वेतन
वर्तमान में इन पदों पर तैनात अधिकारियों का बेसिक वेतन 78,800 रुपये से 1,18,500 रुपये के बीच है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद इन अधिकारियों की बेसिक सैलरी 1.70 लाख रुपये से 2.50 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंचने का अनुमान है।


कैबिनेट सचिव
केंद्र सरकार के सबसे वरिष्ठ अधिकारी, कैबिनेट सचिव का मौजूदा बेसिक वेतन 2.50 लाख रुपये प्रति माह है। आठवें वेतन आयोग के बाद इस पद के लिए बेसिक सैलरी 5 लाख से 6 लाख रुपये प्रति माह के बीच तय की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब महंगाई भत्ता (DA) 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे बेसिक वेतन में मर्ज करने की परंपरा रही है। इससे हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे अन्य भत्तों में भी स्वतः वृद्धि होती है।

 

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