ट्रंप ने PM मोदी की दोस्ती का नहीं किया लिहाज ! भारत पर निकाला गुस्सा,  2 अप्रैल से टैरिफ लागू करने का किया ऐलान

Edited By Updated: 05 Mar, 2025 12:54 PM

trump vows reciprocal tariffs against india china from april 2

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती की परवाह न करते हुए  भारत पर गुस्सा निकाला  और भारत चीन सहित अन्य देशों द्वारा उच्च शुल्क लगाए जाने की आलोचना की और इसे...

Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती की परवाह न करते हुए  भारत पर गुस्सा निकाला  और भारत चीन सहित अन्य देशों द्वारा उच्च शुल्क लगाए जाने की आलोचना की और इसे ‘‘बेहद अनुचित'' करार दिया। ट्रंप ने साथ ही घोषणा की कि अगले महीने से जवाबी शुल्क लगाए जाएंगे। राष्ट्रपति ने जवाबी शुल्क को लेकर अपना पक्ष रखा और कहा कि ये दो अप्रैल से लगाए जाएंगे। वह अन्य देशों से आयात पर वही शुल्क लगाना चाहते हैं, जो वे देश अमेरिका से होने वाले निर्यात पर लगाते हैं।

 

ट्रंप ने मंगलवार रात कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ शुल्क लगाए हैं और अब हमारी बारी है कि हम उन देशों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करें। यूरोपीय संघ (ईयू), चीन, ब्राजील, भारत, मेक्सिको और कनाडा क्या आपने उनके बारे में सुना है।ऐसे अनेक देश हैं जो हमारी तुलना में हमसे बहुत अधिक शुल्क वसूलते हैं। यह बिल्कुल अनुचित है।'' ‘व्हाइट हाउस' (अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में अपने दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस को पहली बार संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत हमसे 100 प्रतिशत से अधिक ऑटो शुल्क वसूलता है।'' फरवरी में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनका प्रशासन ‘‘जल्द'' भारत और चीन जैसे देशों पर जवाबी शुल्क लगाएगा, उन्होंने पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान भी यह कहा था।

 

ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को अमेरिका के जवाबी शुल्क से नहीं बख्शा जाएगा और इस बात पर जोर दिया कि शुल्क संरचना पर कोई भी उनसे बहस नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे उत्पादों पर चीन का औसत शुल्क दोगुना है... और दक्षिण कोरिया का औसत शुल्क चार गुना ज्यादा है। जरा सोचिए, चार गुना ज्यादा और हम दक्षिण कोरिया को सैन्य रूप से तथा कई अन्य तरीकों से इतनी मदद देते हैं। लेकिन यही होता है। यह दोस्त और दुश्मन दोनों की तरफ से हो रहा है। यह प्रणाली अमेरिका के लिए उचित नहीं है।'' 

 

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