Edited By Mehak,Updated: 16 Jan, 2026 06:29 PM

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स स्पीकर लॉर्ड मैकफॉल से मुलाकात की। बैठक में भारत-ब्रिटेन के ऐतिहासिक संसदीय संबंधों, लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय कूटनीति और डिजिटल संसद पर...
नेशनल डेस्क : भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को ब्रिटेन की संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स के स्पीकर लॉर्ड मैकफॉल ऑफ अलक्लुइथ से संसद भवन, नई दिल्ली में मुलाकात की। यह बैठक 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) के मौके पर हुई, जिसकी मेजबानी भारत 14 से 16 जनवरी तक कर रहा है।
उपराष्ट्रपति ने लॉर्ड मैकफॉल का राज्यसभा में स्वागत करते हुए कहा कि उनका भारत आना भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत और पुराने संसदीय संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह दौरा दोनों देशों को एक-दूसरे की संसदीय परंपराओं, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को और करीब से समझने का अवसर देगा।
बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और ब्रिटेन का साझा संसदीय इतिहास रहा है। भारत की संसद व्यवस्था ने वेस्टमिंस्टर मॉडल से प्रेरणा जरूर ली है, लेकिन समय के साथ यह भारत की लोकतांत्रिक जरूरतों के अनुसार विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की संसदें कानून के शासन, संसदीय विशेषाधिकारों और सरकार पर लोकतांत्रिक निगरानी जैसे मूल्यों में समान विश्वास रखती हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए और इसे अव्यवस्था फैलाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे साझा सिद्धांत दोनों देशों के बीच आपसी सीख और सहयोग की मजबूत नींव हैं।
उन्होंने संसदीय कूटनीति को कॉमनवेल्थ संबंधों का अहम स्तंभ बताया और कहा कि भारत संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने संयुक्त कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ज्ञान साझा करने जैसी पहलों पर सहयोग की संभावना जताई।
डिजिटल तकनीक पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने संसद में ई-प्रणालियां, लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण को अपनाया है। उन्होंने हाउस ऑफ लॉर्ड्स के डिजिटल अनुभवों में रुचि दिखाते हुए कहा कि तकनीक के जरिए पारदर्शिता, जनभागीदारी और विधायी प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कॉमनवेल्थ मंच संसद सदस्यों को एक-दूसरे से सीखने और लोकतांत्रिक मानकों को मजबूत करने का अनूठा अवसर देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और ब्रिटेन मिलकर महिला राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने, जलवायु परिवर्तन से निपटने, उच्च शिक्षा को सॉफ्ट पावर के रूप में आगे बढ़ाने और तकनीक के जरिए शासन को अधिक समावेशी बनाने जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग कर सकते हैं।
बैठक के अंत में उपराष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और उम्मीद जताई कि यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगी। इस बैठक में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी मौजूद रहे।